मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, नीरज क्रांतिकारी पर दर्ज एफआईआर को बताया ‘फर्जी’, निष्पक्ष जांच की मांग
मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, नीरज क्रांतिकारी पर दर्ज एफआईआर को बताया ‘फर्जी’, निष्पक्ष जांच की मांग
मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, नीरज क्रांतिकारी पर दर्ज एफआईआर को बताया ‘फर्जी’, निष्पक्ष जांच की मांग
दस्तक7मिडिया, दरभंगा।
मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने छात्र नेता नीरज क्रांतिकारी के खिलाफ लहरियासराय थाने में दर्ज कांड संख्या 142/26 को राजनीति से प्रेरित और फर्जी करार देते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है। यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में एक औपचारिक पत्र सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। जानकारी के अनुसार एम एस यू के जिला अध्यक्ष नीरज क्रांतिकारी ने पिछले दिनों जिले में गैस आपूर्ति की गंभीर किल्लत को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से स्थानीय सांसद की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। संगठन का आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से प्रश्न पूछने और आलोचना करने से असहज होकर, सांसद के प्रभाव में नीरज पर गलत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। एम एस यू का कहना है कि एक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे को ‘जातीय वैमनस्यता’ का रूप देकर मामले को उलझाने का प्रयास किया गया है, जो प्रथम दृष्टया द्वेषपूर्ण प्रतीत होता है। जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि यदि मामला सोशल मीडिया (फेसबुक पोस्ट) से संबंधित था, तो इसकी जांच साइबर थाने के माध्यम से होनी चाहिए थी। इसके विपरीत लहरियासराय थाने में मामला दर्ज करना प्रक्रियात्मक रूप से संदिग्ध और अनैतिक है। संगठन ने जोर देकर कहा है कि जनप्रतिनिधियों से प्रश्न पूछना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे दबाने के लिए कानूनी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। नीरज क्रांतिकारी पर दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। मामले में लगाई गई धाराओं की कानूनी वैधता और उनके औचित्य की समीक्षा हो। यूनियन ने कहा कि यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि मामला राजनीतिक द्वेष या दबाव में दर्ज किया गया है, तो इसे तुरंत निरस्त कर जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाए। छात्र-युवा नेताओं को अनावश्यक मानसिक और कानूनी प्रताड़ना से बचाया जाए।
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