विश्वविद्यालय इतिहास विभाग, पीजी एनएसएस इकाई एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन द्वारा ‘विकसित भारत-2047 एवं महिला शक्ति’ पर सेमिनार आयोजित,
महिलाओं की शिक्षा, समानता, सहभागिता एवं सशक्तिकरण के बदौलत ही विकसित भारत- 2047 का सपना होगा साकार- प्रो पुनीता
महिलाएं सबसे बड़ी मैनेजमेंट गुरु एवं परिवर्तन की वाहिका, जिनमें स्थिति को समझकर तदनुरूप कार्य करने की स्वाभाविक क्षमता मौजूद- डॉ अनिल चौधरी
महिला सशक्तिकरण की प्रतीक प्रो पुनीता झा, डॉ राफिया काजिम तथा डॉ ज्योति प्रभा को पाग, चादर एवं मोमेंटो से किया गया सम्मानित
दस्तक 7मीडिया /अफजल खान
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग, पीजी एनएसएस इकाई एवं डॉ प्रभात दास फाउंडेशन, दरभंगा के संयुक्त तत्त्वावधान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के सुअवसर पर “विकसित भारत-2047 और महिला शक्ति” विषय पर विभागाध्यक्ष डॉ अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय इतिहास विभाग में संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो पुनीता झा-मुख्य अतिथि, एनएसएस समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया- मुख्य वक्ता, विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका डॉ राफिया काजिम-विशिष्ट अतिथि, पीजी इतिहास विभाग के वरिष्ठ शिक्षक डॉ नैयर आजम एवं डॉ अमिर अली खान-विशिष्ट वक्ता, सेमिनार संयोजक डॉ मनीष कुमार-स्वागत कर्ता, पीजी एनएसएस इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ सोनू राम शंकर-संचालक कर्ता तथा फाउंडेशन के सचिव मुकेश कुमार झा ने धन्यवाद कर्ता के रूप में अपना विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण की प्रतीक प्रो पुनीता झा, डॉ राफिया काजिम तथा डॉ ज्योति प्रभा को पाग, चादर एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से, जबकि समापन राष्ट्रगान से हुआ। संगोष्ठी में 100 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं इतिहास, संस्कृत, हिन्दी, मैथिली, प्राचीन भारतीय इतिहास, रसायनशास्त्र, संगीत एवं नाट्य आदि विभाग के विद्यार्थी एवं एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित थे, जिन्हें फाउंडेशन की ओर से सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
प्रो पुनीता झा ने इस सफल सेमिनार के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि सतत एवं संतुलित विकास के साथ ही विकसित भारत-2047 के निर्माण के लिए महिलाओं की भूमिका अहम है। महिलाएं अपेक्षाकृत अधिक संवेदनशील एवं जिम्मेदार होती हैं।
