बिरौल उप-डाकघर के ‘अस्तित्व’ पर प्रहार, विकास के नाम पर संसाधनों की ‘लूट’ से जनता में भारी उबाल
बिरौल उप-डाकघर के ‘अस्तित्व’ पर प्रहार, विकास के नाम पर संसाधनों की ‘लूट’ से जनता में भारी उबाल
बिरौल उप-डाकघर के ‘अस्तित्व’ पर प्रहार, विकास के नाम पर संसाधनों की ‘लूट’ से जनता में भारी उबाल
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
मिथिलांचल के प्रमुख व्यापारिक केंद्र और भविष्य के जिला बनने की दौड़ में शामिल बिरौल के ऐतिहासिक उप-डाकघर के पंख कतरने की प्रशासनिक साजिश ने पूरे क्षेत्र को उद्वेलित कर दिया है। डाक विभाग के हालिया आदेश (सं० A-1/Upgradation/Jakso-Jamalpur BO/2026) के बाद बिरौल डाकघर अब अपनी पुरानी पहचान और संसाधनों के लिए संघर्ष करता दिख रहा है।
जक्सो जमालपुर को उप-डाकघर (DSO) के रूप में अपग्रेड करने का स्वागत तो हुआ, लेकिन इसकी कीमत बिरौल को चुकानी पड़ी है। विभाग के इस ‘कैंची’ चलाने वाले फैसले से बिरौल डाकघर की स्थिति अब ‘नाम बड़े और दर्शन छोटे’ वाली हो गई है।
बिरौल के अधीन आने वाले 21 शाखा डाकघरों में से 09 महत्वपूर्ण शाखाओं (लक्ष्मीपुर काकोरबा, बौराम, कोथराम आदि) को काटकर जक्सो जमालपुर से जोड़ दिया गया है। अब यहां मात्र 12 शाखाएं शेष रह गई हैं।
सबसे बड़ा आघात मैनपावर पर लगा है। बिरौल से LSG PA और PA (डाक सहायक) जैसे महत्वपूर्ण पदों को समाप्त कर जक्सो जमालपुर स्थानांतरित कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि दरभंगा जिले में सबसे अधिक राजस्व और कार्य निष्पादन देने वाले कार्यालयों में बिरौल शीर्ष पर है। ऐसे में यहां पदों की संख्या बढ़ाने के बजाय कम करना समझ से परे है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं
का आरोप है कि यह महज एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि बिरौल की महत्ता को कम करने की एक सोची-समझी “राजनीतिक साजिश” है।
जब बिरौल को जिला बनाने की मांग पुरजोर तरीके से उठ रही है, तब यहां के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के बजाय उसे ‘बोना’ बनाया जा रहा है।
बिरौल प्रखंड के लगभग ढाई लाख नागरिकों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि क्या विभाग यह संदेश देना चाहता है कि बिरौल अब भविष्य का जिला बनने लायक नहीं रहा?
जनता की स्पष्ट चेतावनी–
क्षेत्र की जनता ने विभाग को आगाह किया है कि जक्सो, जमालपुर और नरकटिया जैसे गांवों को बेहतर सेवा देना सराहनीय है, लेकिन बिरौल की ‘बलि’ देकर नहीं। अनुभवी स्टाफ की कमी से बैंकिंग, रजिस्ट्री और बचत योजनाओं के कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे आम जनता को भारी असुविधा होगी। स्थानीय लोगों ने मांग किया है कि
बिरौल उप-डाकघर में पूर्ववत सृजित सभी पदों (LSG PA और PA) को तत्काल बहाल किया जाए।क्षेत्राधिकार के विभाजन पर पुनर्विचार हो ताकि बिरौल की राजस्व क्षमता और प्रशासनिक गरिमा बनी रहे। यदि डाक विभाग ने समय रहते इस तुगलकी फरमान पर पुनर्विचार नहीं किया, तो यह असंतोष एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। बिरौल की जनता अपने ‘डाकघर’ के अस्तित्व की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
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