दरभंगा में 1 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जीविका से बदली गांवों की तस्वीर, कृषि, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों से बढ़ी आय, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
दरभंगा में 1 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जीविका से बदली गांवों की तस्वीर, कृषि, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों से बढ़ी आय, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
दरभंगा में 1 लाख से अधिक महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जीविका से बदली गांवों की तस्वीर,
कृषि, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों से बढ़ी आय, महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
दरभंगा जिले में जीविका के माध्यम से 1 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। लखपति दीदी वे स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य होती हैं जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक होती है और औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से ज्यादा लगातार बनी रहती है।
जीविका के सहयोग से जिले की महिलाएं कृषि, पशुपालन, सब्जी उत्पादन, किराना दुकान, सिलाई-कढ़ाई, पापड़-मसाला, अगरबत्ती निर्माण, मिथिला पेंटिंग और हस्तकला जैसे छोटे व्यवसायों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे समाज में आत्मनिर्भर और सशक्त महिला के रूप में अपनी पहचान भी बना रही हैं।
कई महिलाओं ने लिखी सफलता की कहानी
बहादुरपुर प्रखंड के गायत्री उत्पादक समूह की पूनम कुमारी मिथिला पेंटिंग के माध्यम से अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देकर करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं।
हनुमाननगर प्रखंड की अंजलि देवी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित कर रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय 20 से 25 हजार रुपये तक हो जाती है और क्षेत्र के लोगों को बैंकिंग सुविधा भी आसानी से मिल रही है।
डीएमसीएच अस्पताल में संचालित जीविका दीदी की रसोई में कार्यरत अंजलि कुमारी भी लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं।
बेनीपुर की फुल देवी ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभ लेकर सिलाई का स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है, जिससे वे 20 हजार रुपये से अधिक मासिक आय कमा रही हैं। इसी प्रखंड की रिंकू देवी खाद-बीज व्यापार के साथ “दीदी की नर्सरी” भी चला रही हैं, जिससे उनकी औसत आय 50 हजार रुपये से अधिक है और कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
बहेरी प्रखंड की बबीता देवी, जो कभी दो वक्त के भोजन के लिए भी संघर्ष करती थीं, आज सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़कर सफल उद्यमी बन चुकी हैं और करीब 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही हैं।
हायाघाट प्रखंड की पूनम कुमारी दीदी अधिकार केंद्र में समन्वयक के रूप में कार्य करते हुए न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को सामाजिक व कानूनी अधिकार दिलाने में भी मदद कर रही हैं।
वहीं केवटी प्रखंड की मीना देवी ने आइसक्रीम का व्यापार शुरू कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। उनके माध्यम से 20 से अधिक ठेलों के जरिए आइसक्रीम का रिटेल कारोबार संचालित हो रहा है और वे लाखों रुपये की मासिक आय अर्जित कर रही हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि जीविका के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लखपति दीदी पहल के तहत महिलाओं को कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता, आसान ऋण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं अपनी आय बढ़ाकर लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो सकें।
उन्होंने कहा कि दरभंगा की जीविका दीदियां अपनी मेहनत और लगन से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि पूरे समाज में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी कायम कर रही हैं।