सोशल मीडिया पर ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों पर सख्ती, बिहार पुलिस मुख्यालय ने जारी किए कड़े निर्देश
सोशल मीडिया पर ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों पर सख्ती, बिहार पुलिस मुख्यालय ने जारी किए कड़े निर्देश
सोशल मीडिया पर ‘बच्चा चोरी’ की अफवाहों पर सख्ती, बिहार पुलिस मुख्यालय ने जारी किए कड़े निर्देश
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
सोशल मीडिया पर “बच्चा चोरी” से जुड़ी भ्रामक और अपुष्ट सूचनाओं के तेजी से प्रसार को गंभीरता से लेते हुए बिहार पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ऐसी अफवाहें समाज में दहशत और अव्यवस्था पैदा करती हैं, जिससे निर्दोष लोगों के साथ हिंसक घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है।
इस संबंध में आयोजित विस्तृत प्रेस-वार्ता में अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, डॉ. अमित कुमार जैन ने कहा कि कई मामलों में देखा गया है कि सोशल मीडिया पोस्ट, व्हाट्सएप फॉरवर्ड या बिना स्रोत के वायरल वीडियो को “बच्चा चोरी” की घटना बताकर साझा किया जा रहा है, जबकि जांच में वे पूरी तरह भ्रामक या पुराने वीडियो पाए गए।
अपुष्ट खबरों पर न करें विश्वास
एडीजी ने आम जनता से अपील की कि किसी भी तरह की अपुष्ट सूचना पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे प्रसारित करें। किसी संदिग्ध परिस्थिति या सूचना की पुष्टि के लिए तुरंत अपने नजदीकी थाना से संपर्क करें या आपातकालीन सेवा #Dial112 पर कॉल करें।
उन्होंने कहा कि अफवाहों के आधार पर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की घटनाओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिलों को विशेष निगरानी के निर्देश
पुलिस मुख्यालय द्वारा सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नियमित मॉनिटरिंग की जाए अफवाह फैलाने वाले अकाउंट्स की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।संवेदनशील क्षेत्रों में गश्ती और जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएं।स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षक समुदाय और सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर सही जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए।
अफवाहों से हो सकती है गंभीर क्षति
डॉ. जैन ने बताया कि अफवाहों के कारण कई बार निर्दोष लोगों को शक के आधार पर घेरकर मारपीट करने की घटनाएं सामने आती हैं, जो कानूनन गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं न केवल कानून-व्यवस्था को प्रभावित करती हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाती हैं।
जन-जागरूकता पर जोर
पुलिस ने स्पष्ट किया कि राज्य में “बच्चा चोरी” जैसी घटनाओं को लेकर फिलहाल कोई संगठित गिरोह सक्रिय होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए लोगों से संयम बरतने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की गई है।
अंत में पुलिस प्रशासन ने दोहराया कि अफवाह फैलाना भी दंडनीय अपराध है। आम नागरिकों की सतर्कता, सहयोग और जिम्मेदार व्यवहार से ही ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।