दरभंगा,जर्जर हालत में सुपौल बाजार खादी ग्रामोद्योग केंद्र, बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के पाले में डाली गेंद
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
दरभंगा/पटना। दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड स्थित ऐतिहासिक ‘सुपौल बाजार खादी ग्राम संघ’ (अफजला) की बदहाली का मुद्दा बिहार विधानसभा में गूंजा है। गौरा बौराम के माननीय विधायक श्री सुजीत कुमार द्वारा पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के जवाब में उद्योग विभाग, बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संस्था का जीर्णोद्धार और संरक्षण राज्य सरकार के कार्यक्षेत्र में नहीं आता। विधायक द्वारा पूछे गए सवाल में इसे 1944 में भारतीय चरखा संघ के अधीन स्थापित एक ऐतिहासिक संस्था बताया गया था। हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में कहा कि 1944 की स्थापना से संबंधित कोई आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध नहीं है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, यह संस्था एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जो ‘सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860’ के तहत 15 मई 1973 को निबंधित हुई थी। यह मुजफ्फरपुर की ‘सर्वोदय ग्राम’ (मातृ संस्था) की एक विकेंद्रीकृत इकाई है। रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि सुपौल बाजार के अफजला टोला स्थित यह केंद्र वर्ष 2008-09 से लगभग बंद पड़ा है। लंबे समय से बंद रहने के कारण इसकी इमारत जर्जर हो चुकी है और जमीन पर अतिक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है।
विधायक श्री सुजीत कुमार ने सरकार से पूछा था कि क्या सरकार इसके संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं के पुनर्निर्माण का विचार रखती है? इस पर बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने हाथ खींचते हुए कहा कि,
“उक्त संस्थान उद्योग विभाग, बिहार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। केंद्र की जर्जर स्थिति में सुधार हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार ही सक्षम प्राधिकार है।
राज्य सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद अब इस ऐतिहासिक खादी केंद्र के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है। चूंकि वित्तीय सहायता और कार्यान्वयन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के MSME मंत्रालय के अधीन है, इसलिए अब इसके उद्धार के लिए दिल्ली से ही उम्मीदें बची हैं।

