दरभंगा मेडिकल कॉलेज  के 101वें स्थापना दिवस पर मृत्यु प्रमाणन पर अहम वर्कशॉप 23 फरवरी को

दस्तक 7मीडिया /

डीएमसी के 101वीं स्थापना दिवस के अवसर पर 23 फरवरी 2026 को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक ऑडिटोरियम में एक महत्वपूर्ण वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन Tata Memorial Hospital Muzaffarpur द्वारा किया जाएगा।

वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को मृत्यु प्रमाण-पत्र में मृत्यु के वास्तविक और मूल कारणों को वैज्ञानिक एवं एकरूप तरीके से दर्ज करने का प्रशिक्षण देना है। अक्सर देखा जाता है कि मृत्यु प्रमाण पत्र में “दिल रुकना” या “सांस बंद होना” जैसे तात्कालिक कारण लिख दिए जाते हैं, जबकि मूल बीमारी जैसे टीबी, कैंसर, मधुमेह या हृदय रोग का स्पष्ट उल्लेख आवश्यक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मृत्यु के कारणों का डाटा एकरूपता और वैज्ञानिक पद्धति से दर्ज नहीं किया जाएगा, तब तक स्वास्थ्य योजनाओं के निर्माण में विसंगतियां बनी रहेंगी। सही आंकड़ों के आधार पर ही सरकार यह तय कर सकती है कि किन बीमारियों से सर्वाधिक मृत्यु हो रही है और किन क्षेत्रों में विशेष हस्तक्षेप की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण प्रणाली पर मिलेगा प्रशिक्षण

मृत्यु के कारणों को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करने के लिए रोगों का अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण (ICD-10) प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसे World Health Organization ने विकसित किया है। इस प्रणाली में प्रत्येक बीमारी के लिए एक निश्चित कोड निर्धारित होता है। प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों को इसी मानक प्रणाली के अनुरूप मृत्यु प्रमाणन की प्रक्रिया समझाई जाएगी।

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अएशिक चक्रवर्ती (यूएससीओडी, एचबीसीएच एवं आरसीके प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) हैं। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. रितेश कुमार ऋतुराज, डॉ. बुराहनूदीन कुयामी एवं डॉ. निशांत कुमार भी भाग लेंगे। डीएमसी के सभी विभागों के चिकित्सक इस कार्यशाला में शामिल होंगे।

पीजी छात्रों का साइंटिफिक कार्यक्रम व एआई पर डिबेट

22 फरवरी को पीजी छात्रों के लिए आयोजित साइंटिफिक कार्यक्रम का उद्घाटन डीएमसी के न्यू लेक्चर थिएटर में प्राचार्य डॉ. यू.सी. झा, डॉ. पी.के. लाल, डॉ. आसिफ शाहनवाज एवं डॉ. सुशील कुमार सहित वरीय चिकित्सकों ने किया। कार्यक्रम में दो दर्जन पीजी छात्रों ने पोस्टर और पेपर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए।

अपराह्न 4 बजे से “स्वास्थ्य सेवा में एआई वरदान है” विषय पर डिबेट प्रतियोगिता आयोजित की गई। पक्ष में पांच और विपक्ष में छह वक्ताओं ने अपने विचार रखे।

पक्ष में माहिरा खानम (2023) प्रथम, डॉ. भवेश कुमार (इंटर्न) द्वितीय तथा 2025 बैच की स्निग्धा सिंह तृतीय रहीं। विपक्ष में अमन कुमार (2023) प्रथम, दीपा भारती (2025) द्वितीय एवं आरिफ इकबाल (2021) तृतीय स्थान पर रहे।

जज डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि एआई मानव निर्मित तकनीक है, जो हमारी सहायता के लिए है। इसे नैतिक और मानवीय संवेदनाओं के अनुरूप विकसित करना हमारी जिम्मेदारी है। पर्यवेक्षक डॉ. ओम प्रकाश ने एआई समिट में प्रधानमंत्री Narendra Modi के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को खुली छूट दें, लेकिन उसकी कमान मानव के हाथों में ही रहनी चाहिए।