हर्निया ऑपरेशन के बाद 7 साल के मासूम की मौत, निजी नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप; डॉक्टर व प्रबंधन फरार
हर्निया ऑपरेशन के बाद 7 साल के मासूम की मौत, निजी नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप; डॉक्टर व प्रबंधन फरार
हर्निया ऑपरेशन के बाद 7 साल के मासूम की मौत, निजी नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप; डॉक्टर व प्रबंधन फरार
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पंडासराय स्थित रामनगर डब्लूआईटीआई के पास संचालित एक निजी नर्सिंग होम में हर्निया ऑपरेशन के बाद 7 वर्षीय मासूम की संदिग्ध मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। घटना गुरुवार देर रात की बताई जा रही है। मृतक की पहचान बहेड़ी थाना क्षेत्र के सिरूआ गांव निवासी विशाल पासवान के पुत्र रामराजी (7) के रूप में हुई है। घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और प्रबंधन के लोग अब मौके से फरार बताए जा रहे हैं,हालांकि घटना के दों दिन बीत जाने के बाद भी अबतक पीड़ित परिवार की और से थाने में आवेदन नहीं दिया गया हे।
15 हजार में ऑपरेशन की बात, 10 हजार जमा
परिजनों के अनुसार, बच्चे को हर्निया के ऑपरेशन के लिए बुधवार को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन के लिए 15 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें से 10 हजार रुपये तत्काल जमा कराए गए। बच्चे की मां रेणु देवी ने बताया कि डॉक्टर ने ऑपरेशन को सामान्य बताते हुए आश्वस्त किया था कि बच्चा जल्द स्वस्थ हो जाएगा।
बताया गया कि भर्ती के दिन जांच तो की गई, लेकिन रिपोर्ट परिजनों को नहीं दिखाई गई। डॉक्टर ने ऑपरेशन से पहले बच्चे को कुछ भी खाने-पीने से मना किया, जिसके कारण बच्चा पूरे दिन भूखा रहा। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे उसका ऑपरेशन किया गया।
ऑपरेशन के बाद बिगड़ी हालत
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। उसके मुंह से खून निकल रहा था और वह दर्द से कराह रहा था। मां के अनुसार, बच्चा बार-बार कह रहा था, “मम्मी, मुझे यहां से ले चलो, मैं मर जाऊंगा।”
आरोप है कि कई बार डॉक्टर को बुलाने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। शाम तक बच्चे की स्थिति गंभीर हो गई। जब परिजनों ने दबाव बनाया तो अस्पताल प्रबंधन ने दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन जब तक दूसरे अस्पताल पहुंचे, तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
हंगामा, अस्पताल प्रबंधन पर सवाल
मौत की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। जब वे दोबारा नर्सिंग होम पहुंचे तो वहां डॉक्टर और प्रबंधन के लोग मौजूद नहीं थे। ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों ने नर्सिंग होम की मान्यता, डॉक्टरों की योग्यता और उपलब्ध सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।
जांच में स्वास्थ्य नियमों की अनदेखी
बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुन्जय कुमार ने बताया कि आवेदन मिलने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी लेकिन अबतक कोई आवेदन नहीं मिला हे।
वहीं, सीएचसी प्रभारी डॉ. तारिक मंजर ने बताया कि सूचना मिलने के बाद नर्सिंग होम की जांच की गई, जिसमें स्वास्थ्य नियमों की व्यापक अनदेखी सामने आई है। जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
अस्पताल संचालक मनीष कुमार से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। नर्सिंग होम के बैनर पर दिए गए मोबाइल नंबर पर भी कॉल का जवाब नहीं मिला।
मासूम की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
वहीं दूसरी और चर्चा हे कि अस्पताल प्रबंधक ने पीड़ित पक्ष को मैनेज कर लिया हे जिस कारण कोई आवेदन थाना को अब तक नहीं दिया गया।