डीएमसीएच में जीविका निधि ऋण नीति पर कार्यशाला, 207 कर्मियों को मिला प्रशिक्षण,

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल, डिजिटल ऋण प्रणाली पर विशेष जोर

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

समाहरणालय स्थित जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गुरुवार को डीएमसीएच परिसर में संचालित जीविका दीदी की रसोई में बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी संघ लिमिटेड की ऋण नीति पर आधारित एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिले के सभी 18 प्रखंडों से आए कुल 207 प्रखंड एवं जिला स्तरीय जीविका परियोजना कर्मियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी, शान्तनु ठाकुर, ब्रजकिशोर गुप्ता, राजा सागर, रिसोर्स पर्सन पन्नालाल एवं राजेश जी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने जीविका निधि की उपयोगिता और ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. ऋचा गार्गी ने कहा कि जीविका निधि के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को समय पर ऋण उपलब्ध होगा, जिससे वे छोटे व्यवसाय, कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, सिलाई, दुकान, उत्पादन इकाइयों एवं सेवा क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। इससे उनकी मासिक आय में वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने इसे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

ब्रजकिशोर गुप्ता ने ऋण नीति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सरल, पारदर्शी एवं कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराना है। प्रतिभागियों को जीविका निधि की संरचना, सदस्यता प्रक्रिया, ऋण स्वीकृति प्रणाली, पात्रता मानदंड, भुगतान व्यवस्था एवं निगरानी प्रणाली की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में ‘जीविका निधि मोबाइल एप’ के माध्यम से ऋण आवेदन, स्वीकृति, वितरण एवं वसूली की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित करने की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षकों ने लाइव डेमो के जरिए एप के उपयोग की प्रक्रिया समझाई और डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया।

संचार प्रबंधक राजा सागर ने इसे माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं (एमएफआई) से मुक्ति की दिशा में सशक्त पहल बताया। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेने को विवश होती हैं, जिससे वे ऋण चक्र में फंस जाती हैं। जीविका निधि सुरक्षित, पारदर्शी एवं कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर इस समस्या से निजात दिलाने का प्रयास कर रही है।

सूक्ष्म वित्त प्रबंधक सुबीर झा ने प्रशिक्षण के दौरान ऋण की विभिन्न श्रेणियों की जानकारी देते हुए बताया कि सभी ऋणों पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर लागू होगी।
• अल्पकालिक ऋण: ₹15,000 तक (12 माह)
• सूक्ष्म ऋण: ₹15,000 से ₹75,000 तक (24 माह)
• लघु ऋण: ₹75,000 से ₹2,00,000 तक (36 माह)

उन्होंने बताया कि 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के सक्रिय समूह सदस्यों को लोकओएस के माध्यम से सत्यापन के बाद ऋण दिया जाएगा। एनपीए खाते वाले सदस्य एवं सरकारी कर्मचारी योजना के अंतर्गत पात्र नहीं होंगे। प्राकृतिक आपदा या विशेष परिस्थितियों में ऋण पुनर्गठन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

रिसोर्स पर्सन पन्नालाल एवं राजेश जी ने संचालन, जोखिम प्रबंधन एवं पारदर्शिता प्रणाली पर मार्गदर्शन दिया तथा क्षेत्र स्तर पर महिलाओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने का आह्वान किया।

कार्यशाला में जिला स्तर के सभी प्रबंधक, सभी प्रखंडों के बीपीएम, क्षेत्रीय समन्वयक, सामुदायिक समन्वयक, कार्यालय सहायक, लेखपाल एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे योजना के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वरोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण विकास को गति देने की दिशा में इस कार्यशाला को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।