एक कमरे में सिमटा भविष्य, बिरौल के ‘हाटी कन्या’ विद्यालय में एक साथ बैठती हैं 5 कक्षाएं, बदहाली की इंतहा

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

डिजिटल इंडिया और शिक्षा के अधिकार के बड़े-बड़े दावों के बीच दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो व्यवस्था की पोल खोल रही है। यहां के प्राथमिक विद्यालय हाटी कन्या की पूरी दुनिया महज एक कमरे में सिमट कर रह गई है।
हाल ही में विद्यालय की प्रधान शिक्षिका नाज़नीन बानो द्वारा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को लिखे गए पत्र ने विद्यालय की दयनीय स्थिति को उजागर किया है। पत्र के अनुसार, पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने के बावजूद विद्यालय के पास अपना भवन नहीं है।
एक कमरे में ‘खिचड़ी’ बनती है और पढ़ाई भी
हैरानी की बात यह है कि इसी एक कमरे में स्कूल का पूरा संचालन हो रहा है। समस्याओं की फेहरिस्त लंबी है।

कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे एक ही छत के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शिक्षक एक साथ पांच स्तर के बच्चों को कैसे पढ़ा पाते होंगे, यह सोच से परे है।
विद्यालय के जरूरी कागजात, रजिस्टर और कार्यालय की सामग्री भी इसी कमरे में रखी जाती है।
दोपहर के भोजन (मध्याह्न भोजन) का राशन भी इसी क्लासरूम में स्टोर होता है और भोजन का कार्यान्वयन भी यहीं किया जाता है।
भवन के साथ-साथ विद्यालय की चारदीवारी भी नहीं है। इसके अभाव में न केवल स्कूल की संपत्ति असुरक्षित है, बल्कि छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी हर वक्त डर बना रहता है।
प्रधान शिक्षिका और अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने कई बार गुहार लगाई है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। “जब जगह ही नहीं होगी, तो बच्चे एकाग्रता से कैसे पढ़ेंगे?” यह सवाल आज हर उस अभिभावक का है जिसका बच्चा इस स्कूल में पढ़ रहा है।
उज्ज्वल भविष्य का सपना देखने वाले इन मासूमों के लिए क्या प्रशासन जागेगा? विद्यालय ने औपचारिक रूप से भवन और चारदीवारी निर्माण की मांग की है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस ‘एक कमरे वाले स्कूल’ को कब तक वास्तविक विद्यालय का स्वरूप दे पाता है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने भी विद्यालय भवन की कमी होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध भूमि पर ही विद्यालय भवन निर्माण हेतु एस्टीमेट तैयार करने के लिए विभागीय अभियंता को कहा गया है।