मिथिला के गौरव को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की ऐतिहासिक पहल,

महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह को भारत रत्न देने की सिफारिश की मांग

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 


बिहार विधान परिषद के 212वें सत्र में मिथिला के गौरव और इतिहास से जुड़ा एक ऐतिहासिक विषय सदन में गूंजा। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं बिहार विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर ने गैर-सरकारी संकल्प के माध्यम से बिहार सरकार से यह मांग की कि मिथिला के महान दानी, राष्ट्रनिर्माता एवं संविधान सभा के सदस्य महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान करने की अनुशंसा केंद्र सरकार से की जाए।

सदन में संकल्प प्रस्तुत करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि डॉ. कामेश्वर सिंह का योगदान केवल मिथिला ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, राष्ट्रीय रक्षा, संविधान निर्माण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। ऐसे महापुरुषों को राष्ट्रीय सम्मान दिलाना हमारा नैतिक और ऐतिहासिक दायित्व है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “मिथिला के स्वाभिमान, इतिहास और पहचान की यह लड़ाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।”

इस अवसर पर कामेश्वर धार्मिक न्यास के ट्रस्टी युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह ने विधान परिषद सदस्य घनश्याम ठाकुर के प्रति राज परिवार की ओर से विशेष आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जनता की यह मांग रही है, जिसे सदन के पटल पर मजबूती से रखा गया है। यह न केवल राज परिवार बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

युवराज कुमार कपिलेश्वर सिंह ने भावुक शब्दों में कहा कि “मेरे दादा महाराजा कामेश्वर सिंह एक असाधारण व्यक्तित्व थे। उन्होंने शिक्षा, संस्कृति, कला, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आज भी अतुलनीय है। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए उन्होंने जीवनभर कार्य किया, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।”

उन्होंने भारत सरकार से आग्रह किया कि दानवीर महाराजाधिराज डॉ. कामेश्वर सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और मिथिला के इतिहास को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।