दरभंगा में आक्रोश की आग में किसने डाला मिट्टी का तेल? 5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के बाद उपद्रव, पुलिस पर पथराव, मास्टरमाइंड की तलाश जरूरी ,ताकि भविष्य में होने वाली ऐसी घटना पर लगे विराम ?
दरभंगा में आक्रोश की आग में किसने डाला मिट्टी का तेल? 5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के बाद उपद्रव, पुलिस पर पथराव, मास्टरमाइंड की तलाश जरूरी ,ताकि भविष्य में होने वाली ऐसी घटना पर लगे विराम ?
दरभंगा में आक्रोश की आग में किसने डाला मिट्टी का तेल? 5 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म-हत्या के बाद उपद्रव, पुलिस पर पथराव, मास्टरमाइंड की तलाश जरूरी ,ताकि भविष्य में होने वाली ऐसी घटना पर लगे विराम ?
दस्तक 7मीडिया/संजय कुमार राय
कहते हैं कि जलती हुई आग पर अगर मिट्टी का तेल डाल दिया जाए, तो वह भड़क उठती है। कुछ ऐसा ही मंजर विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में उस वक्त देखने को मिला, जब 5 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म एवं हत्या की हृदयविदारक घटना के बाद जनाक्रोश उबाल पर आ गया।
इस अमानवीय घटना से स्थानीय लोग पहले से ही आहत और आक्रोशित थे। परंतु इसी संवेदनशील माहौल में कुछ असामाजिक तत्वों ने हालात को और भड़काने का काम किया, जिससे पूरा इलाका देखते-ही-देखते अशांत हो उठा और शहर में तनाव फैल गया।
सड़क जाम से पथराव तक पहुँचा मामला
आक्रोशित भीड़ ने पहले सड़क जाम किया, फिर देखते-ही-देखते पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट गए। इस दौरान कई पुलिसकर्मियों को पत्थरों से चोटें भी आईं। पुलिस को बड़ी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाना पड़ा।
पुलिस की तत्परता पर सवाल नहीं
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए बच्ची का शव बरामद किया। मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटा रही थी , ताकि दोषियों को कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।
यहां बता दे कि सूचना मिलते ही कोहरे के बीच घटना के रात ही संवेदनशीलता को देखते हुए SSP एवं City SP स्तर के पदाधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर विश्वविद्यालय, लहेरियासराय,नगर थानाध्यक्षों एवं टेक्निकल सेल,FSL team को स्वयं निर्देश दे रहे थे,और जानकारी ले रहें थें और कारवाई की दिशा में शख्त कदम उठा रहें थें।
वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और जिलाधिकारी (DM) ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह पॉक्सो एक्ट का गंभीर मामला है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यूट्यूबर-ब्लॉगर बने कानून के उल्लंघनकर्ता
इस बीच एक और गंभीर पहलू सामने आया है। कई यूट्यूबर और ब्लॉगरों ने व्यू, लाइक और कमेंट्स के चक्कर में पीड़िता की पहचान उजागर कर दी। कुछ ने बच्ची का नाम, पिता का नाम और पता तक सार्वजनिक कर दिया, जो कि पॉक्सो एक्ट का सीधा उल्लंघन है।
बताया जा रहा है कि जब उन्हें कानून की गंभीरता का एहसास हुआ, तो कुछ यूट्यूबरों ने अपने वीडियो डिलीट कर दिए, लेकिन कई आपत्तिजनक वीडियो अब भी सोशल मीडिया पर हैं।
सवालों के घेरे में “आग भड़काने वाले चेहरे”
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह कौन लोग थे, जिन्होंने शांतिपूर्ण न्याय की मांग कर रहे लोगों को उकसाकर सड़क पर उतार दिया?सड़क जाम किसके कहने पर किया गया?भीड़ को हिंसा के लिए किसने प्रेरित किया?
यह ऐसे अहम सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना अब पुलिस-प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन गई है।आग भड़काने वाले चेहरे जो आग भड़काने वाले थे और भड़का भी दिये ,वह बाद में पुलिस के साथ मामला शांत करने में भी लगे हुए थे। यह बात पुलिस भी बखूबी जानती है।फिर ऐसे चेहरे पर से नकाब हटाना जरूरी हे।
पुलिस की दोहरी कार्रवाई
पुलिस ने जहां उपद्रव और पथराव के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और वीडियो फुटेज के आधार पर हुड़दंगियों की पहचान की जा रही है, वहीं यह भी साफ किया गया है कि पॉक्सो कानून का उल्लंघन करने वाले यूट्यूबर, चैनल और ब्लॉगरों पर भी कार्रवाई तय है। अभी तक कुल छह उपद्रवियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है
हालांकि, बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि केवल सामने दिख रहे उपद्रवियों पर नहीं, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम के मास्टरमाइंड को भी चिन्हित कर सामने लाना जरूरी है, ताकि भविष्य में दरभंगा फिर किसी साजिश की आग में लोग न झुलसे।
पूरा जिला आहत, सिर्फ न्याय की मांग
5 वर्षीय मासूम के साथ हुई इस जघन्य घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। आम लोग, बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठन सभी की एक ही मांग है: न्याय और सख्त सजा।
कई लोगों का मानना है कि पुलिस-प्रशासन इस मामले में बेहतर और गंभीरता से काम कर रहा है और इस संवेदनशील समय में उपद्रवियों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना के बाद साफ है कि अपराधियों को सजा दिलाने के साथ-साथ समाज में जहर घोलने वालों को भी बेनकाब करना उतना ही जरूरी है।न्याय की लड़ाई को हिंसा में बदलने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई ही भविष्य के लिए सही संदेश होगी।