महिला थाना कांड 182/2025 : SSP से शिकायत के बावजूद कार्रवाई ठप, जांच रिपोर्ट लंबित, मौनी बाबा अब भी फरार ,किसके संरक्षण में है आरोपी?

दस्तक 7 मीडिया | संजय कुमार राय

दरभंगा महिला थाना में दर्ज गंभीर पॉक्सो एक्ट के मामले में अब पुलिस की भूमिका ही सवालों के घेरे में आ गई है। महिला थाना कांड संख्या 182/2025 में जहां एक ओर पीड़ित पक्ष न्याय की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर थानाध्यक्ष से लेकर जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारियों की चुप्पी कई शंकाओं को जन्म दे रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथा वाचक की गिरफ्तारी के बावजूद आरोपी राम उदित दास उर्फ “मौनी बाबा” अब तक क्यों फरार है?क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण का परिणाम?

SSP तक पहुंची थी शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य

कांड की सुचिका ने 02 जनवरी 2026 को स्वयं वरीय पुलिस अधीक्षक से मिलकर महिला थानाध्यक्ष सह अनुसंधानकर्ता के विरुद्ध लिखित शिकायत दी थी। आरोप था कि अभियुक्तों को न्यायिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से त्रुटिपूर्ण और पक्षपातपूर्ण अनुसंधान किया जा रहा है।वहीं अपर थानाध्यक्ष पर आरोप हें कि तीन दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज करने में लापरवाही बरती गई ?इस कारण 19दिसंबर 25को थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई।पॉक्सो कानून में यह गंभीर लापरवाही हें।

शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया कि न्यायालय में नाबालिग पीड़िता का बयान दर्ज हुआ था, जिसे अनुसंधानकर्ता ने देखा भी, लेकिन इसके बावजूद यह तथ्य कांड दैनिकी में जानबूझकर अंकित नहीं किया गया। क्या यह महज़ भूल है या सोची-समझी चूक?

मोबाइल जब्ती में भी हेरफेर का आरोप

सुचिका ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तार अभियुक्त श्रवण दास के पास से जो मोबाइल जब्त किया गया, उसके संबंध में दैनिकी में लिखा गया कि कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।जबकि प्राथमिकी में जिस मोबाइल नंबर का उल्लेख था, वह जब्त ही नहीं किया गया, बल्कि किसी अन्य मोबाइल की जब्ती दर्शा दी गई।परिजनों का आरोप है कि यह सब अभियुक्त को लाभ पहुंचाने की नीयत से किया गया।

DSP को दी गई जांच की जिम्मेदारी, रिपोर्ट अब तक गायब

मामले की गंभीरता को देखते हुए SSP ने DSP (सदर-1) को मोबाइल और व्हाट्सएप के माध्यम से अनुसंधान की त्रुटियों की जांच कर प्रतिवेदन देने और जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया था।लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक न कोई जांच रिपोर्ट आई, न ही किसी पुलिस पदाधिकारी पर इस लापरवाही को लेकर कार्रवाई हुई।

परिजनों का कहना है कि DSP स्तर से ही महिला थानाध्यक्ष और अपर थानाध्यक्ष को बचाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि पर्यवेक्षण में कथावाचक और मौनी बाबा की गिरफ्तारी का निर्देश दिया गया था।

मौनी बाबा की गिरफ्तारी पर रहस्यमयी चुप्पी

सबसे गंभीर आरोप यह है कि फरार अभियुक्त मौनी बाबा की गिरफ्तारी के लिए न कोई ठोस छापेमारी हुई,न तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया , न ही न्यायालय से वारंट प्राप्त किया गया

परिजनों का दावा है कि महिला थानाध्यक्ष द्वारा मौनी बाबा को यह संकेत दिया गया कि वह अग्रिम जमानत करा ले, उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, जिसके बाद उसने अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी।

नाबालिग की शादी कर डेढ़ साल तक शोषण :क्या यह पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन नहीं?

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि एक नाबालिग लड़की की कथावाचक से  मौनी बाबा के पहल पर शादी कराई गई, और करीब डेढ़ साल तक उसे बरगलाया गया।

परिजनों का सीधा सवाल है 

अगर यह पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध है, तो फिर मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं?

आपराधिक इतिहास भी दर्ज नहीं

इतना ही नहीं, प्रभावशाली मौनी बाबा का पुर्व से थाने में दर्ज कांडो का अब तक कांड दैनिकी में अंकित नहीं किया गया है, जबकि कानून के अनुसार अनिवार्य हें।

न्याय की राह ताकता पीड़ित पक्ष

मामले में अब भी जांच रिपोर्ट लंबित है। पीड़ित परिवार प्रशासनिक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है।अब सवाल यही हें कि  क्या कानून सबके लिए बराबर है?