कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में पीओ की लापरवाही से मनरेगा योजना ठप, मजदूरों पलायन करने के लिए मजबूर।

दस्तक 7 मीडिया, प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान।

कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) विगत कई महीनों से पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। योजना के बंद रहने से क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मजदूरों के सामने गंभीर रोज़गार संकट उत्पन्न हो गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि प्रखंड के अधिकांश मजदूर रोज़ी-रोटी की तलाश में बाहर पलायन करने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई महीनों से प्रखंड में मनरेगा के तहत कोई भी नई योजना शुरू नहीं की गई है। पहले से स्वीकृत योजनाएं भी अधर में लटकी हुई हैं। काम की मांग करने के बावजूद मजदूरों को रोजगार नहीं मिल रहा है। नतीजतन परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। मजबूरी में मजदूर दिल्ली, पंजाब, गुजरात और अन्य महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने की सबसे बड़ी योजना मानी जाती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को उनके ही गांव में सौ दिनों का रोजगार देना है, ताकि पलायन रोका जा सके। लेकिन कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड में यह योजना अपने उद्देश्य से पूरी तरह भटकती नजर आ रही है। मजदूरों का आरोप है कि योजना में लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण काम बंद है।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले मनरेगा से तालाब खुदाई, सड़क मरम्मत, मिट्टी भराई, नाला निर्माण जैसे कार्य होते थे, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल जाता था। अब काम बंद होने से मजदूर दिनभर खाली बैठने को मजबूर हैं। कई परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही मनरेगा की योजनाओं को शुरू नहीं किया गया तो पलायन और बढ़ेगा, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की स्थिति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि अविलंब मनरेगा की लंबित योजनाओं को शुरू किया जाए और नई योजनाओं को स्वीकृति दी जाए, ताकि उन्हें गांव में ही रोजगार मिल सके। अब देखना यह है कि जिला और प्रखंड प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ठोस कदम उठाता।

प्रखंड प्रमुख अंजनी भारती बताती है कि इस मामले में कई बार कार्यालय में पीओ को कहा गया कि जिस पंचायत ने 75 प्रतिशत कार्य कर लिया है वहां नया योजना चलाए इसके बाबजूद पीओ योजना नहीं खोल रहे है।