कुशेश्वरस्थान पुलिस की ‘वेट एंड वॉच’ नीति ने सुलगते हरीनगर को आग में झोंका,एसएसपी के निर्देश पर एसडीओ और डीएसपी के नेतृत्व में गांव में हुई शांति समिति की बैठक
कुशेश्वरस्थान पुलिस की ‘वेट एंड वॉच’ नीति ने सुलगते हरीनगर को आग में झोंका,एसएसपी के निर्देश पर एसडीओ और डीएसपी के नेतृत्व में गांव में हुई शांति समिति की बैठक
कुशेश्वरस्थान पुलिस की ‘वेट एंड वॉच’ नीति ने सुलगते हरीनगर को आग में झोंका,एसएसपी के निर्देश पर एसडीओ और डीएसपी के नेतृत्व में गांव में हुई शांति समिति की बैठक
दस्तक7मिडिया, दरभंगा।
हरीनगर गांव में दो समुदायों के बीच उपजा तनाव अब केवल एक विवाद नहीं, बल्कि खाकी की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बन गया है। ग्रामीण सड़कों से लेकर चौक-चौराहों तक बस एक ही चर्चा है अगर पुलिस ‘तमाशबीन’ न बनी होती, तो हरीनगर लहूलुहान होने से बच सकता था।
जानकारों के अनुसार विवाद की जड़ें 30 जनवरी 2026 को ही गहरी हो गई थीं, जब हेमकांत झा द्वारा कुशेश्वरस्थान थाने में एक लिखित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में स्पष्ट रूप से दो जातियों के बीच बढ़ते वैमनस्य और हिंसा की आशंका का उल्लेख था। कानून के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि यह एफआईआर पुलिस के लिए एक ‘अलार्म’ की तरह थी। यदि पुलिस उसी समय मुस्तैदी दिखाते हुए संवेदनशील इलाकों में गश्ती बढ़ा देती या शरारती तत्वों पर निरोधात्मक कार्रवाई करती, तो अगले ही दिन की भयावह तस्वीर रोकी जा सकती थी।
पुलिस की सुस्ती का नतीजा 31 जनवरी को सामने आया, जब गांव में दोबारा हिंसा भड़क उठी। आरोप है कि पुलिस प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा था। जो तत्परता पुलिस ने खून बहने के बाद दिखाई, वही सक्रियता यदि 24 घंटे पहले दिखाई गई होती, तो कई निर्दोषों को शारीरिक क्षति नहीं पहुंचती और गांव में विधि-व्यवस्था कायम रहती।
घटना के बाद पुलिस की भूमिका एक बार फिर कटघरे में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मामला शांत कराने के बजाय पुलिस ने एकपक्षीय कार्रवाई करने में पूरी ऊर्जा लगा दी।
सवाल 1: जब 30 जनवरी को ही तनाव की सूचना लिखित रूप में थी, तो पुलिस ने ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ क्यों नहीं की?
सवाल 2: क्या पुलिस प्रशासन किसी दबाव में काम कर रहा था या फिर यह उनकी रणनीतिक विफलता थी?
सवाल 3: हिंसा के बाद दिखाई गई ‘अति-सक्रियता’ आखिर घटना से पहले क्यों गायब थी?
हरीनगर की स्थिति फिलहाल अंदर ही अंदर तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है, परंतु क्षेत्र में लोगों के मन में पुलिस के प्रति अविश्वास की खाई चौड़ी हो गई है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब रक्षक ही सूचनाओं को गंभीरता से लेना छोड़ दें, तो समाज को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। उच्च अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप कर दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
हालांकि वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश में अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिरौल के नेतृत्व में कुशेश्वरस्थान थानाध्यक्ष द्वारा कुशेश्वरस्थान थाना अंतर्गत ग्राम हरिनगर में गणमान्य व्यक्तियों एवं ग्रामीणों के साथ शांति समिति का बैठक की गई ,गांव में शांति का माहौल हें।