मिथिला विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

दस्तक 7 मीडिया दरभंगा:

सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में रसायन विज्ञान की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है।रसायन विज्ञान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण,स्वास्थ्य सुधार,स्वच्छ ऊर्जा और उद्योगों के विकास जैसे कई बड़े लक्ष्यों को पूरा किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग की ओर से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘मल्टीडिस्किपलिनरी एस्पेक्ट्स ऑफ केमिकल साइंसेस(आईसीएमएसीएस-2026)’का आयोजन किया गया,जिसका समापन समारोह दरभंगा में हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए संगोष्ठी के अध्यक्ष एवं मिथिला विश्वविद्यालय के विज्ञान संकायाध्यक्ष सह।रसायनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि इस तरह की संगोष्ठियां रसायन विज्ञान से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा का अच्छा मंच प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में नए रासायनिक शोध,हरित और सतत रसायन विज्ञान की शिक्षा,पर्यावरण के अनुकूल रासायनिक उत्पादन पद्धतियां और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बहुत जरूरी हो गई है। वर्तमान और भविष्य के रसायनशास्त्रियों को इन सभी क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभानी होगी,ताकि पृथ्वी और मानव जीवन को सुरक्षित रखा जा सके। प्रो. चौधरी ने आगे कहा कि रसायन विज्ञान का प्रभाव केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है,बल्कि इसका सीधा संबंध तकनीक,अर्थव्यवस्था और मानव स्वास्थ्य से है। दवाइयों के निर्माण से लेकर स्वच्छ पानी,ऊर्जा उत्पादन और कृषि तक रसायन विज्ञान हर जगह अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि रसायन विज्ञान अणुओं का विज्ञान है और अणु ही सभी पदार्थों के मूल आधार हैं। इस तरह कहा जाए तो रसायन विज्ञान हर चीज से जुड़ा हुआ विज्ञान है और इसका भविष्य भी उज्ज्वल है। समापन समारोह के मुख्य अतिथि मिथिला विश्वविद्यालय के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रो.नौशाद आलम ने कहा कि अन्य विज्ञान विषयों जैसे भौतिकी,गणित और जीव विज्ञान की तुलना में रसायन विज्ञान एक ऐसा मौलिक विज्ञान है,जिसका सीधा संबंध उद्योगों से है। रसायन विज्ञान ने मानव जीवन को बेहतर बनाने,लोगों के स्वास्थ्य को सुधारने और समाज को समृद्ध बनाने में हजारों वर्षों से योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि पिछले करीब 5,000 वर्षों में रसायन विज्ञान ने वैश्विक सभ्यता के विकास में बड़ी भूमिका निभाई है। प्रो. आलम ने कहा कि 21वीं सदी में भी रसायन विज्ञान तकनीकी बदलावों की दिशा तय करता रहेगा। आज रसायन विज्ञान के छात्र और शोधार्थी जैव प्रौद्योगिकी,पर्यावरण निगरानी,फॉरेंसिक विज्ञान,खाद्य विज्ञान और हरित रसायन विज्ञान जैसे नए और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपना भविष्य बना रहे हैं। रसायन विज्ञान आधारित उद्योग अच्छी और गुणवत्तापूर्ण नौकरियां उपलब्ध करा रहे हैं,जिससे छात्र विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. पी.के. झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में देश-विदेश से आए प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए और नए शोध विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान रसायन विभाग के दो शोधार्थी गौरव कुमार और केशव कुमार को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए डॉ. नीलांबर चौधरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में अभिजीत ने प्रथम स्थान,आनंद ने द्वितीय स्थान और वंशीधर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
समापन समारोह में डॉ. अभिषेक राय,डॉ. अनिरूद्ध शर्मा, डॉ. सोनू राम शंकर, डॉ. मोनी शर्मा सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और रसायनशास्त्र विभाग के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का समापन सकारात्मक संदेश के साथ हुआ कि रसायन विज्ञान के माध्यम से सतत और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।