दरभंगा के दो वरीय अधिवक्ता सहित पांच लोगों को आजीवन सश्रम कारावास और 05-05 लाख रूपया अर्थ दण्ड की सजा

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा/विधि संवाददाता,

सिविल कोर्ट दरभंगा के अपर सत्र न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर की अदालत ने शनिवार को करीब 32 वर्ष से चल रहे हत्या और जानलेवा हमला मामले में दो वकील सहित पांच लोगों को आजीवन सश्रम कारावास और पांच पांच लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।

लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि चर्चित पटोरी हत्याकांड 8 अगस्त 1994 को संध्या 7बजे की है। पटोरी गाँव के दस पशुपालकों ने अपने मवेशी को गुणसार पोखर में पानी पिलाकर निकले ही थे कि बसंत गाँव के लोगों ने गोली की बौछार कर दस लोगों को जख्मी कर दिया। एक जख्मी राम कृपाल चौधरी उर्फ कपल चौधरी का निधन इलाज के दौरान अस्पताल में हो गई। दूसरे जख्मी का निधन ईलाज के कुछ महीने बाद हो गई। आठ जख्मियों में किसी को बाँह, किसी को पेट, किसी को पैर आदि में जख्म हुई थी। जघन्य अपराध कारित किये जाने को लेकर 9 अगस्त 1994 को विशुनपुर थाना प्राथमिकी संख्या 58 /94 संस्थित की गई। जिसमें तेरह नामजद और दस अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया। इस मुकदमा में एक अभियुक्त फरार हो गया। बारह अभियुक्त के विरुद्ध आरोप गठन किया गया। जिसमें से दो ट्रायल के दरमियान अनुपस्थित हो गया। पांच अभियुक्त की मृत्यु हो गई। एक सत्र वाद के तहत कौशर इमाम हाशमी का विचारण किया गया। दूसरे सत्र वाद के तहत अम्बर इमाम हाशमी सहित चार अभियुक्तों का विचारण किया गया। दिनांक 5 जनवरी 2026 को हत्या और जानलेवा हमला में दोषी घोषित करते हुए पांच अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में दरभंगा जेल भेज दिया गया। सजा के विंदु पर एपीपी रेणु झा ने शनिवार को बहस की और सभी जख्मियों को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा देने की याचना कोर्ट से की जिसे अदालत ने स्वीकार किया ।सत्रवाद संख्या 320/2010 में कौशर हाशमी को 302 /109 में आजीवन सश्रम कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदण्ड तथा 307/149 में दस वर्ष की कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है एवं अर्थदण्ड का भुगतान नहीं करने पर एक साल का साधारण कारावास की सजा भूगतना पड़ेगा। वहीं सत्रवाद संख्या 326 /1999 में अम्बर इमाम हाशमी, राजा हाशमी, अंजार हाशमी, मोविन हाशमी को 302/149 भादवि में आजीवन सश्रम कारावास पांच लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा मुकर्रर किया गया है तथा 307/149 में दस वर्ष की कारावास और पांच लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है। अर्थदण्ड का भुगतान नहीं करने पर एक साल का साधारण कारावास की सजा भूगतने का प्रावधान किया गया है। पीड़ित पक्ष के वकील चंद्रकांत सिंह ने बताया कि उनके गुरुदेव अधिवक्ता स्वर्गीय ब्रजमोहन सिंह इस मुकदमा के प्रारंभिक काल में जो दायित्व मुझे सौंपा था उसका बखूबी निर्वहन किया। आज का निर्णय ही उनके प्रति गुरुदक्षिणा है। जिसका मुझे संतोष है।

लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा