सेमिनार में शामिल होने से शोधार्थियों की बढ़ती है लिखने और सोचने की प्रवृत्ति : प्रो. संजय कुमार चौधरी

कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में हासिल कर ली हैं ऐतिहासिक उपलब्धियां : प्रो. दिलीप कुमार चौधरी

रिसर्च के क्षेत्र में दिमाग से ज्यादा दिल लगाकर कार्य करने वालों की जरूरत: प्रो. विनोद कुमार तिवारी

मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग की ओर से ‘मल्टीडिस्किपलिनरी एस्पेक्ट्स ऑफ केमिकल साइंसेस (आईसीएमएसीएस-2026)’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ शुभारंभ

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

सेमिनार में शामिल होने से शोधार्थियों की लिखने और सोचने की प्रवृत्ति बढ़ती है। केमिकल साइंसेस का प्रयोग सभी क्षेत्रों में किया जाता है। 2020 के दशक में, केमिकल साइंसेस तेजी से प्रगति के साथ कई अनपेक्षित सफलताएं हासिल की। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग की ओर से ‘मल्टीडिस्किपलिनरी एस्पेक्ट्स ऑफ केमिकल साइंसेस (आईसीएमएसीएस-2026)’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के सफलतम दो वर्षों के कार्यकाल पूरा होने पर उनके समान में आयोजित समान समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कही। कुलपति ने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में कार्य होने से विश्वविद्यालय नैक, एनईपी 2020 व अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ेगा। विद्वता की कोई सीमा नहीं होती है। प्राध्यापक का कार्य केवल नौकरी करना नहीं होता है, बल्कि नवाचार को बढ़ाना होता है।

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के अध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शोधार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए समय-समय पर सेमिनार का आयोजन होना चाहिए। इस सेमिनार से छात्रों को काफी लाभ पहुंचेगा। साथ ही प्रो. दिलीप ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के सफलतम दो वर्षों के कार्यकाल पूरा होने पर उनके समान में आयोजित समान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने विकास, शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक पारदर्शिता के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर ली। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आगे बढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में मिथिला विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सुधार, शोध एवं नवाचार, डिजिटल शिक्षा और आधारभूत संरचना के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्वविद्यालय में नई शैक्षणिक योजनाओं की शुरुआत, पाठ्यक्रमों का अद्यतन, ऑनलाइन एवं हाइब्रिड शिक्षण प्रणाली का विस्तार तथा शोध कार्यों को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि कुलपति ने विश्वविद्यालय को केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला के रूप में विकास किया है। छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी समान महत्व दिया गया है। साथ ही मिथिला क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय शोध और जनोपयोगी परियोजनाओं को बढ़ावा देने का कार्य किए हैं।

सेमिनार के मुख्य अतिथि बीएचयू के प्रो. विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि रिसर्च के क्षेत्र में दिमाग से ज्यादा दिल लगाकर कार्य करने वालों की जरूरत है। मिथिला विश्वविद्यालय में युवा प्राध्यापक को बढ़ावा मिलने के कारण विश्वविद्यालय निरंतर पढ़ाई के साथ रिसर्च में नव आयाम स्थापित कर रहा है। केमिस्ट्री का ही असर है कि सभी रंग में कोई न कोई विटामिन पाया जाता है। सभी विषयों में केमिस्ट्री होता है। उन्होंने कहा कि मिथिला विश्वविद्यालय का भवन भी मंदिर की तरह ही है। वित्तीय परामर्शी इंद्र कुमार ने भी समान-समारोह को संबोधित किया। रसायनशास्त्र विभाग के शिक्षक डॉ. अनिरुद्ध शर्मा ने सेमिनार को सम्बोधित करते हुए कहा कि सेमिनार के आयोजन से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है। डॉ. अभिषेक राय ने रसायनास्त्र विभाग में नित्य किए जा रहे प्रयोग से लोगों से अवगत कराते हुए कहा कि विभाग के शिक्षक शोध पत्र प्रस्तुत करने के साथ ही एडवांस स्टडी और नैक में विश्वविद्यालय को बेहतर ग्रेड मिले इसके लिए कार्य कर रहे हैं। सेमिनार में जर्नल का भी विमोचन किया गया। समान समारोह को प्रो. अशोक कुमार मेहता, वैद्यनाथ चौधरी, डॉ. शाहिद हसन, प्रो. अरुण कुमार सिंह एवं प्रो. हरे कृष्ण ने भी संबोधित किया। डॉ. मोनी शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। सेमिनार में डॉ. सोनू राम शंकर, छात्र-छात्राओं के सैकड़ों की संख्या में शोधार्थी शामिल थे।