बेता थानाध्यक्ष प्रकरण:  सदर SDPO के जांच रिपोर्ट का इंतजार,  ‘भारत सरकार’ बोर्ड लगी गाड़ी का क्या मतलब ?इस बोर्ड के सहारे हो रहा था सरकार के पैसे का अप्रत्यक्ष रूप से गबन और पुलिस को दिखाई गई हेकड़ी ?

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

बेता थानाध्यक्ष से जुड़े विवादित प्रकरण को दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी जला रेड्डी ने गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच का जिम्मा सदर SDPO राजीव कुमार को सौंप दिया है। SSP ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रतिवेदन प्राप्त होते ही आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में अब अर्टिगा वाहन के चालक और महिला चिकित्सक पर भी प्राथमिकी दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।

27 जनवरी का वायरल वीडियो बना जांच की जड़

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 27 जनवरी को एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें बेता थानाध्यक्ष द्वारा अर्टिगा गाड़ी के चालक के साथ गाली-गलौज करते हुए दिखाया गया। इस दौरान उक्त गाड़ी में एक महिला चिकित्सक मौजूद थी, जिसने थानाध्यक्ष का वीडियो बना कर वायरल कर दिया।

हालांकि, वीडियो में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन परिस्थितियों में थानाध्यक्ष ने गाली का प्रयोग किया, क्योंकि उस घटनाक्रम का पूरा वीडियो सामने नहीं लाया गया। बावजूद इसके, SSP ने मामले को गंभीर मानते हुए बेता थानाध्यक्ष को तत्काल निलंबित कर दिया।

भारत सरकार’ लिखा बोर्ड और नो-एंट्री उल्लंघन

इसी प्रकरण से जुड़ा एक दूसरा वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें उसी अर्टिगा गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ लिखा बोर्ड लगा हुआ दिखाई दिया। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के सामने आते ही गाड़ी के आगे से वह बोर्ड हटा लिया गया, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया।

जब इस विषय में SSP से सवाल किया गया तो उन्होंने भी माना कि“यदि वह महिला चिकित्सक हैं, तो निजी गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगाकर चलना नियमों का खुला उल्लंघन है।”

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच सदर SDPO को सौंपी गई है और रिपोर्ट मिलते ही नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

घटना का दूसरा पक्ष भी आया सामने

जांच के दौरान सामने आया कि अर्टिगा चालक ने थानाध्यक्ष के गाड़ी रोकने के  इशारे के बाद गाड़ी इतनी तेज कर दी कि थानाध्यक्ष और दो पुलिसकर्मियों को कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी। स्थानीय लोगों के अनुसार, अगर वे नहीं कूदते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

आगे जाम में गाड़ी रुकने पर थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और चालक को शीशा खोलने का इशारा किया, लेकिन चालक ने शीशा नहीं खोला। इसी दौरान थानाध्यक्ष गुस्से में आ गए और गाली का प्रयोग कर बैठे, जिसका सीमित वीडियो बनाकर महिला चिकित्सक ने वायरल कर दिया।

महिला चिकित्सक की भूमिका पर उठे सवाल

महिला चिकित्सक की कार्यशैली पर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि वह नो-एंट्री में मैप के सहारे आ रही थीं, उस समय ट्रैफिक पुलिस तैनात थी, लेकिन उन्हें रोका नहीं गया।

DGP भी सख्त, फर्जी नेम प्लेट पर ज़ीरो टॉलरेंस

इस पूरे मामले में बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) भी सख्त रुख अपनाए हुए हैं। उनका स्पष्ट निर्देश है कि

“किसी भी निजी वाहन पर प्रेस, पुलिस, बिहार सरकार या भारत सरकार जैसी नेम प्लेट लगी हो, तो उसकी तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।”

स्थानीय लोगों की मांग: महिला चिकित्सक और चालक पर FIR हो

स्थानीय लोगों का कहना है कि भारत सरकार’ का बोर्ड लगाकर नो-एंट्री उल्लंघन,टोल टैक्स से बचने की संभावित धोखाधड़ी, और सरकारी पहचान का दुरुपयोग गाड़ी में बैठी महिला चिकित्सक और चालक द्वारा की गई हें और ये सभी गंभीर अपराध हैं। लोगों की मांग है कि महिला चिकित्सक और वाहन चालक दोनों पर प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस फर्जी बोर्ड के सहारे और कहां-कहां नियमों की अनदेखी की गई।अब सबकी निगाहें सदर SDPO की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।