वायरल गालीबाज दारोगा मामला: अर्टिगा गाड़ी पर ‘भारत सरकार’ बोर्ड बना रहस्य, चालक और महिला पर कार्रवाई न होने से उठे गंभीर सवाल,एसएसपी के कारवाई पर टिकी आम जनता और पुलिसकर्मियों की निगाहें।ट्रेफिक उल्लंघन मामले में एक महिला ,दों वीडियो ,दोनों वीडियो वायरल 

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

दरभंगा ज़िले में दो दिन पूर्व वायरल हुए गालीबाज दारोगा वीडियो मामले में वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा बेता थानाध्यक्ष को निलंबित किए जाने के बाद अब यह मामला एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक ओर पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थानाध्यक्ष पर गाज गिराई, वहीं दूसरी ओर घटना से जुड़े चालक और अर्टिगा गाड़ी में सवार महिला पर अब तक किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं होने से चर्चाओं का बाज़ार गर्म है।

महिला की पहचान पर सवाल, ‘भारत सरकार’ बोर्ड ने बढ़ाई शंका

बताया जा रहा है कि अर्टिगा गाड़ी पर सवार महिला को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। कभी उन्हें डॉक्टर बताया जा रहा है, कभी भारत सरकार की कर्मचारी, तो कभी टोल टैक्स बचाने अथवा किसी अन्य गलत गतिविधि से जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है क्यूंकि गाड़ी में बोर्ड भारत सरकार GOVT OF INDIA लिखा हुआ हें।

इस पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है वही महिला और वही गाड़ी का एक दूसरा वीडियो, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अर्टिगा गाड़ी (नंबर BR01JJ8462) के आगे स्पष्ट रूप से “भारत सरकार” का बोर्ड लगा हुआ दिखाई देता है।

कानूनी सवाल: डॉक्टर या सरकारी कर्मी, तो बोर्ड किस अधिकार से?

यदि संबंधित महिला डॉक्टर हैं, तो नियमानुसार वाहन पर डॉक्टर/मेडिकल सर्विस से संबंधित पहचान होनी चाहिए। वहीं यदि वह भारत सरकार की कोई अधिकृत कर्मचारी हैं, तो सरकारी वाहन अथवा वैध अनुमति का दस्तावेज़ सामने आना आवश्यक है।

ऐसे में बिना वैधानिक अधिकार के निजी वाहन पर “भारत सरकार” का बोर्ड लगाना, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 170 (सरकारी कर्मचारी का प्रतिरूपण), धारा 419/420 (धोखाधड़ी),और मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता हें,इसीलिये  नये बीएनएसएस का नियम जो भी हो ,इस गाड़ी के चालक और उस महिला पर लगाना उचित हें ताकि समाज में कानून की व्यवस्था बनी रहें।

चालक की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जानकारी के अनुसार, 27 जनवरी 2025 को बेता थानाध्यक्ष द्वारा इसी अर्टिगा वाहन का चालान किया गया था। इसके बावजूद उसी नंबर की गाड़ी पर फिर से ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगाकर उल्टे रास्ते में चलने का वीडियो वायरल होना यह दर्शाता है कि या तो नियमों की खुलेआम अवहेलना हो रही है या फिर किसी प्रकार का संरक्षण प्राप्त है।

अगर पुलिसकर्मी नहीं बचते तो क्या होता?

घटना के दिन थानाध्यक्ष और अन्य पुलिसकर्मियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। यदि ऐसा नहीं होता और कोई अनहोनी घटती, तो संभवतः यह मामला “दुर्घटना” बताकर समाप्त कर दिया जाता और पुलिस मुख्यालय से शोक संदेश जारी होता। लेकिन ईश्वर की कृपा से जान बच गई, जिससे आज सच्चाई पर सवाल उठाने का अवसर मिला है।

जवाबदेही और कर्तव्य का प्रश्न

मीडिया संस्थान दस्तक 7 मीडिया वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन उपलब्ध तथ्यों और वीडियो के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग करता है। यदि जांच में यह साबित होता है कि वाहन पर अवैध रूप से ‘भारत सरकार’ का बोर्ड लगाया गया था, तो चालक और गाड़ी में सवार महिला दोनों पर प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करना पुलिस की जवाबदेही और कर्तव्य है।

ट्रेफिक मामले में एक महिला दों वीडियो ,दोनों वीडियो वायरल 

कार्रवाई नहीं हुई तो उठेंगे गंभीर सवाल

यदि इस मामले में केवल थानाध्यक्ष को निलंबित कर शेष जिम्मेदारों को छोड़ दिया जाता है, तो इससे न केवल कानून का उपहास होगा बल्कि आम जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि नियम सबके लिए समान नहीं हैं।

अब निगाहें वरीय पुलिस अधीक्षक की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं ,कि क्या कानून सबके लिए बराबर होगा या यह मामला भी रसूखो के आंचल में दब जाएगा ?क्यूंकि इस मामले का जांच रिपोर्ट अभी तक ना सोशल मीडिया पर आया और ना पत्रकारों को जानकारी दी गई ,जो गंभीर मामला हें।ऐसे में कनीय पुलिस पदाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशों का निर्वहन कैसे करेंगे तब तो यही होगा कि गलती करने वालों पर कारवाई नहीं कर उसके पैर को पकड़कर पुलिसकर्मी माफी मांग ले ?