महिला थाना कांड संख्या 182/25 में अनुसंधान पर गंभीर सवाल, पीड़िता के परिजनों ने महिला थानाध्यक्ष से पूछे 11 तीखे प्रश्न,कहा मौनी बाबा को बचाने के लिये थानाध्यक्ष ने लगा दी हें पूरी ताकत ,आलाधिकारी मौन ?

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

महिला थाना कांड संख्या 182/25 को लेकर पीड़िता के परिजनों ने अनुसंधान की निष्पक्षता और वैधानिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का आरोप है कि महिला थानाध्यक्ष द्वारा न केवल पोक्सो एक्ट के प्रावधानों की अनदेखी की गई, बल्कि कांड के अनुसंधान में बार-बार लापरवाही और संदिग्ध कार्यशैली अपनाई गई,और मौनी बाबा को बचाने के लिये पूरी ताकत झोंक दी हें।

परिजनों द्वारा उठाया गया पहला सवालो में यह है कि पोक्सो एक्ट के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत महिला थानाध्यक्ष ने पुरुष पुलिसकर्मी को अनुसंधाक क्यों बनाया गया? यह अपने आप में कानून के उल्लंघन का गंभीर मामला बताया जा रहा है।

दूसरे सवाल में यह पूछा गया है कि महिला थानाध्यक्ष ने उक्त मुकदमे का अनुसंधान प्रभार किस समय ग्रहण किया, दोनों घटनास्थलों का निरीक्षण किस समय किया, साक्षियों का बयान, पीड़िता की चिकित्सकीय जांच तथा न्यायालय में पीड़िता का बयान किस समय लिया गया ?क्या इन सभी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख कांड दैनिकी में किया गया ?

तीसरे सवाल में कहा गया है कि 02 जनवरी 2026 को न्यायालय में दिए गए पीड़िता के बयान का अवलोकन करने के बाद क्या महिला थानाध्यक्ष ने उसे कांड दैनिकी में अंकित किया? यदि किया, तो किस तारीख और किस समय?

चौथे सवाल में अनुसंधान की गुणवत्ता पर प्रश्न उठाते हुए पूछा गया है कि अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा दिए गए 14 पर्यवेक्षण निर्देशों में से कितने निर्देशों का पालन किया गया?

पांचवें सवाल में फरार अभियुक्त राम उदित दास उर्फ मौनी बाबा के खिलाफ कार्रवाई पर संदेह जताया गया है। परिजनों ने पूछा है कि क्या उसके विरुद्ध न्यायालय से अजमानतीय वारंट लिया गया? यदि हाँ, तो कब और कितने बजे, और क्या इसका उल्लेख कांड दैनिकी में है?

छठे सवाल में गिरफ्तार अभियुक्त श्रवण दास के मोबाइल को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि क्या उसी मोबाइल नंबर की बरामदगी हुई है जिसका उल्लेख वादिनी ने प्राथमिकी में किया था? यदि नहीं, तो किस आधार पर यह दर्ज किया गया कि अभियुक्त के मोबाइल में पीड़िता का कोई अश्लील वीडियो या फोटो नहीं पाया गया?

सातवें सवाल में यह पूछा गया है कि अब तक अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध कोई साक्ष्य संकलन किया गया है या नहीं?

आठवें सवाल में आरोप है कि पीड़िता को जिन-जिन व्यक्तियों द्वारा धमकियां दी जा रही थीं, उस बिंदु पर अब तक कोई ठोस साक्ष्य क्यों नहीं जुटाया गया?

नवें सवाल में फरार अभियुक्त मौनी बाबा की 03 अप्रैल 2024 को हुई दूसरी घटना के समय की टावर लोकेशन की जांच पर सवाल उठाया गया है कि क्या यह जांच की गई या नहीं।

दसवें सवाल में कहा गया है कि गवाह बार-बार महिला थाना गवाही देने जाते हैं, लेकिन महिला थानाध्यक्ष अक्सर थाना से अनुपस्थित रहती हैं, जिससे अनुसंधान प्रभावित हो रहा है।

ग्यारहवें और अंतिम सवाल में यह पूछा गया है कि क्या जब्ती सूची को कांड दैनिकी में विधिवत अंकित किया गया है या नहीं?

पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि यदि इन सभी सवालों के जवाब कांड दैनिकी में दर्ज नहीं हैं, तो वरीय पुलिस पदाधिकारी चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं? परिजनों ने आशंका जताई है कि महिला थानाध्यक्ष बार-बार गलत अनुसंधान कर अभियुक्तों को न्यायिक लाभ पहुंचाने के लिए कृतसंकल्पित हैं। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि कहीं यह पूरा मामला रसूखदारों के दबाव में तो नहीं दबाया जा रहा?

अंत में परिजनों ने तीखा प्रश्न किया है कि यदि पुलिस का कर्तव्य दोषियों को सजा दिलाना है, तो इस मामले में हो रही कथित लापरवाही क्या केवल एक ढकोसला नहीं  हें।