लोकतंत्र पर पहरा? मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले समाजसेवी प्रियंका झा की हिरासत ने उठाए गंभीर सवाल

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

नेतागिरी करते-करते तानाशाही की ओर बढ़ते कदम,ऐसा एहसास अब आम लोगों को होने लगा है। पहले पत्रकारिता पर दबाव और अब सरकार की गलतियों पर सवाल उठाने वालों पर सख़्ती। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं मानो दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने का अधिकार भी धीरे-धीरे सिमटता जा रहा हो।

इसी कड़ी में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दरभंगा जिला में  कार्यक्रम से पहले समाजसेवी प्रियंका झा को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही पुलिस अधिकारियों ने घात लगाकर प्रियंका झा को हिरासत में ले लिया और बार बार उसके साथ यही किया जाता हें ?ऐसे में सवाल यह है कि क्या लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात रखना अब अपराध बन गया है?

पूरा मामला माउंट समर कॉन्वेंट स्कूल से जुड़ा है, जहाँ एक नौ वर्षीय छात्र कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस जाँच के बाद इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन इस निष्कर्ष से आहत और असंतुष्ट कश्यप की माँ ने ज़हर खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस हृदयविदारक घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया और आम लोगों के बीच गुस्सा व सवाल दोनों पैदा कर दिए।

इन्हीं सवालों की आवाज़ बनीं समाजसेवी प्रियंका झा। उन्होंने पूछा“क्या नौ साल का बच्चा आत्महत्या कर सकता है? क्या इस मामले की निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण जाँच नहीं होनी चाहिए?”
प्रियंका का आरोप है कि ऐसे मामलों में अक्सर स्कूल के सीसीटीवी कैमरे खराब हो जाते हैं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठते हैं और अंततः पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाता।यही नहीं स्कूल के मानकों की जांच करना प्रशासन उचित नहीं समझता ,नवोदय समेत माउंट समर कॉन्वेंट स्कूल की यह घटना क्या दर्शाता हें ?

प्रियंका झा का कहना है कि वह इन्हीं मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहती थीं। लेकिन इसके पहले ही रात भर प्रशासनिक अधिकारियों के फोन उन्हें परेशान करते रहे और सुबह घर से निकलते ही पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रियंका का आरोप है कि लोकतंत्र में सरकारें लोगों के वाजिब अधिकार छीन रही हैं।

प्रियंका झा ने साफ शब्दों में कहा,“ बिहार और भारत में सरकारें लोगों का मुंह खुलने से पहले ही बंद कर दें, तो फिर यह  देश लोकतांत्रिक कैसे कहलाएगा?”