डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर ठगी: बिहार पुलिस की जनता से अपील ,”सतर्क रहें, सुरक्षित रहें”

दस्तक 7मीडिया /

बिहार पुलिस ने आम नागरिकों को साइबर अपराधियों के एक नए और खतरनाक तरीक़े “डिजिटल अरेस्ट” को लेकर सतर्क किया है। पुलिस के अनुसार, कभी भी कोई पुलिस अधिकारी, बैंक कर्मचारी या सरकारी कर्मी फोन कॉल या वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करता। इस तरह की सभी कॉल पूरी तरह फ्रॉड होती हैं।

हाल के दिनों में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, बैंक अधिकारी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। ये अपराधी वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी, नकली आईडी और सरकारी दफ्तर जैसा माहौल दिखाकर यह दावा करते हैं कि पीड़ित किसी गंभीर अपराध में शामिल है और उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। इसके बाद वे जांच से बचाने, मामला रफा-दफा करने या गिरफ्तारी रोकने के नाम पर पैसे और निजी जानकारी की मांग करते हैं।

बिहार पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई प्रावधान नहीं है।पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। किसी भी सरकारी कार्यवाही के लिए व्यक्तिगत जानकारी, ओटीपी, बैंक विवरण या पैसे फोन पर नहीं मांगे जाते।

यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की कॉल आती है, तो घबराएं नहीं,कॉल करने वाले की बातों पर विश्वास न करें ,कोई भी व्यक्तिगत या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें,तुरंत कॉल काट दें।

साथ ही, ऐसी घटना की सूचना नज़दीकी थाना में दें या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से न केवल आपकी मेहनत की कमाई बच सकती है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचने में भी पुलिस को मदद मिलती है।

बिहार पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे खुद भी सतर्क रहें और अपने परिवार, रिश्तेदारों और बुजुर्गों को भी इस तरह के साइबर फ्रॉड के बारे में जागरूक करें।