वन वे उल्लंघन में बड़ा हादसा टला ,बाल बाल बच गये बेता  थानाध्यक्ष और दों सिपाही ?चालक की दादागिरी ने उड़ाये पुलिस वालों के होश ,गुस्सा ठंडा होते ही …..और इंसानियत की पाठ पढ़ाकर गाड़ी को छोड़ दिया बेता थानाध्यक्ष ?

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

………..और बाल बाल बच गये बेता थाना के थानाध्यक्ष और दों सिपाही ?

वरना सोमवार के दिन इन तीनों पुलिस कर्मी का आखिरी दिन होता। मामला था कि वन वें उल्लंधन करते हुये एक अर्टिगा गाड़ी आ रहा था ,इस दौरान बेता थानाध्यक्ष एवं उनके कर्मी ड्यूटी निभा रहें थें ,वहीं दोनार से कर्पूरी चौंक आने वाली सड़कों पर लंबा जाम था ,वजह कल मुख्यमंत्री का दरभंगा में भी आगमन हें,ड्यूटी पर तैनात वन वें उल्लंघन करते अर्टिगा गाड़ी को तेजी से आता देख थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार और दों सिपाही उक्त गाड़ी को हाथ दे रहें थें ,लेकिन चालक इतने मस्त था कि गाड़ी पर ब्रेक लगाना मुनासिब नहीं समझा  , थानाध्यक्ष और दोनों सिपाही सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। चालक गाड़ी लेकर भागा ,लेकिन आगे सड़क जाम था जिस कारण चालक को गाड़ी रोकना पड़ा। इतने में थानाध्यक्ष और सिपाही दौड़कर उस गाड़ी के पास गये और चालक को गेट खोलने को कहा ,चालक ने शीशा नहीं खोला ,स्वाभाविक हें इतना कुछ होने के बाद थानाध्यक्ष गुस्से में आ गये ,क्यूंकि उन्हें चोट भी काफी लगी थी ,जब शीशा नहीं खोला गया  तो उनके मुंह से कुछ गालियां निकल गई ,जिसे गाड़ी पर सवार एक महिला ने वीडियो बना लिया?और वीडियो वायरल कर दिया।

बताया जा रहा हें कि गाड़ी में सवार वह महिला चिकित्सक हें,और पुलिस पर भद्दी भद्दी गाली का आरोप लगा रही हें।दरअसल जब इस तरह की घटना का अंजाम चालक द्वारा दिया गया तो वह महिला चिकित्सक कहाँ थी ?उन्हें चालक को तेज गाड़ी चलाने से रोकना चाहिये था।अब एक वीडियो हे  जो वायरल हो रहा हें ,यह वीडियो बस उतने देर का हें जब थानाध्यक्ष भड़क रहें हें ? इस मामले में  उक्त चिकित्सक को पुरा वीडियो दिखाना चाहिये जिसमें चालक की गलती और थानाध्यक्ष का गुस्सा दोनों दिखाई पड़े ,थोड़ा सा वीडियो दिखाकर सिर्फ थानेदार या पुलिस कर्मी पर आरोप लगाना कहाँ तक सही हें ?
वास्तविक रूप से देखा जाय तो अगर चालक ने गाड़ी को रोक दिया रहता तो ऐसी बात नहीं होती ,गाड़ी की स्पीड इतनी थी कि थानाध्यक्ष और सिपाही गाड़ी के किनारे यानि सड़क के दोनों तरफ कूदकर अपनी जान बचाई, नहीं तो उनकी जान भी जा सकती थी  या किसी अस्पताल में उनके टूटे शरीर के हड्डी का इलाज हो रहा होता,जाम के कारण चालक ने तेजी से गाड़ी भगाकर रोका    फिर थानाध्यक्ष और सिपाही दौड़कर वहां पहुंचे।इसके बाद अंदर बैठी एक महिला ने वीडियो बनाया।

ऐसे में देखना होगा कि गलती किसकी हें ?उस चालक की या फिर थानाध्यक्ष की। पुलिस तो अपना काम कर रही थी। वन वें का उल्लंधन कौन किया ?पुलिस पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास पहले किसने किया ?
इतना सब कुछ होने के बाद जब पीछे से शीशा खुला तो महिला चिकित्सक ने पुलिस को बताया कि वह पटना से आ रही थी और गूगल मैप के कारण वन वें में आ गई हें ,और भी कई कारण बताई ,इतना सुनते ही थानाध्यक्ष का गुस्सा शांत हुआ और इतना सुनने के बाद थानाध्यक्ष ने दरिया दिली दिखाई और इस गलती के लिये गाड़ी का चालान 4हजार रुपये का काट दिया ?जुर्माना की राशि काटने के  बाद फिर गाड़ी में सवार महिला चिकित्सक इन पुलिस कर्मियों पर फिर से भड़क गई,और गुस्से में लाल हो गई।

यहां बता देना जरूरी हें कि अगर आप भूल चूक से वन वें में गाड़ी लेकर प्रवेश कर गये हें तो पुलिस के साथ दादागिरी करना कतई से उचित नहीं हें  ,पुलिस भी इंसान ही हें ,और 24 घंटे ड्यूटी करती हें ,अगर आप प्रेम से बात करते हें ,उन्हें सम्मान देते हें तो निश्चित ही आपको भी वें सम्मान देंगें ,अगर आप दादागिरी से बाज नहीं आयेंगे तो पुलिस क्या करेगी ??आप नियमों का पालन कीजिये ,दरभंगा पुलिस आपके साथ हें।