सादगी और त्याग की प्रतिमूर्ति: डॉ. लक्ष्मण झा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

दस्तक7मिडिया, अमीत झा, गौड़ा बौराम।

कलियुग के इस दौर में सतयुग के आदर्शों को जीने वाले महान विद्वान और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. लक्ष्मण झा की पुण्यतिथि शुक्रवार को उनके पैतृक गांव रसियारी में अत्यंत गरिमा के साथ मनाई गई। यह आयोजन मात्र एक रस्म नहीं, बल्कि उस महान व्यक्तित्व को याद करने का जरिया था जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और सादगी को समर्पित कर दिया।
डॉ. लक्ष्मण झा का जीवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं। मात्र 12 वर्ष की अल्पायु में, जब बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, डॉ. झा स्वतंत्रता आंदोलन के कठिन रास्तों पर निकल पड़े थे।
उन्होंने 1930 से 1939 के बीच साइमन कमीशन विरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसी ऐतिहासिक लड़ाइयों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
उन्होंने ‘बाल ब्रह्मचारी’ जीवन को अपनाया, जो उनके दृढ़ निश्चय और सन्यासी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान गौड़ाबौराम विधायक सुजीत कुमार ने डॉ. झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने डॉ. झा को ‘भारतीय बौद्धिक परंपरा का एक विलक्षण अध्याय’ बताते हुए कहा कि वे केवल एक सेनानी नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के शिक्षाविद् और विद्वान भी थे। उनका जीवन त्याग और सादगी का जीवंत उदाहरण है। विधायक श्री कुमार ने कहा कि आज के समाज को डॉ. लक्ष्मण झा जैसे व्यक्तित्वों की कमी खलती है। रसियारी गांव में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा ने एक बार फिर उनके महान कार्यों और राष्ट्र के प्रति उनके बलिदान की यादें ताजा कर दीं।