लहेरियासराय थाना के सामने दर्द, दहशत और बेबसी की दो कहानियाँ , इंसानियत के बोझ तले जूझती पुलिस

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

लहेरियासराय थाना इन दिनों सिर्फ कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि इंसानी त्रासदियों का भी गवाह बन रहा है। कभी-कभी ऐसी घटनाएँ अचानक घट जाती हैं, जिनसे पुलिस भी विचलित हो जाती है और हालात संभालने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

बुधवार की दोपहर थाना के ठीक सामने अफरा-तफरी मच गई। अचानक एक ई-रिक्शा (BR07ER-3854) पलट गया। तेज आवाज सुनकर लोग दौड़े, थानाध्यक्ष समेत थाना के पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे। ई-रिक्शा पर सवार एक गर्भवती महिला और वृद्ध चालक सड़क पर गिरे पड़े थे। महिला के मुंह के पास गहरी चोट लगी थी, खून बह रहा था, वहीं चालक का पैर बुरी तरह जख्मी था। पुलिस और स्थानीय लोगों के सहयोग से ई-रिक्शा उठाया गया और दोनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

इलाज के बाद जब चालक थाना लौटा, तो उसकी जिंदगी की सच्चाई सामने आई। उसके बाएं पैर की उंगलियां पहले से कटी हुई थीं। कांपती आवाज में उसने बताया कि उसका एक ही बेटा है, जो रोज़गार के लिए एक साल पहले दिल्ली गया था और अब तक घर नहीं लौटा। वह खुद एक निजी कॉलेज में चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी है, जहां महीनों से वेतन नहीं मिला। बहू और दो मासूम पोतियों का पेट पालने के लिए वह ई-रिक्शा चलाने को मजबूर है।

इसी बीच यह भी सूचना मिली कि पीछे बैठी गर्भवती महिला का गर्भ इस हादसे में नष्ट हो गया। दर्द यहीं खत्म नहीं होता। बताया गया कि यही वृद्ध चालक पहले एपीएम थाना क्षेत्र में एक दुर्घटना का कारण बन चुका है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और उसी हादसे में उसके पैर की उंगलियां कट गई थीं। चालक मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। गाड़ी चलाते समय वह कई बार बेसुध हो जाता है और दुर्घटना हो जाती है।

इसी दिन एक और घटना ने थाना परिसर को हिला कर रख दिया। जेल से हाल ही में छूटा एक 35 वर्षीय युवक नशे में धुत हालत में पकड़ा गया और हाजत में बंद किया गया। कुछ ही देर बाद वह अपने माथे को हाजत की लोहे की रॉड से पीटने लगा। माथा छिल गया, खून बहने लगा। वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा, गालियां देने लगा, फिर अचानक देशभक्ति गीत गाने लगा। पूरा थाना अस्त-व्यस्त हो गया, पुलिसकर्मी असमंजस में पड़ गए। हालात बिगड़ते देख थानाध्यक्ष ने उसे तुरंत मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा। कानून के रखवाले भी कई बार खामोशी से इन दर्दनाक कहानियों का बोझ अपने कंधों पर ढोने को मजबूर हैं।