दरभंगा पॉक्सो मामला: कथावाचक और मौनी बाबा को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म, लेकिन सच प्राथमिकी और कानून के दायरे में?डीआईजी ने कहा कि मामले में हो रही हें समीक्षा।
दरभंगा पॉक्सो मामला: कथावाचक और मौनी बाबा को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म, लेकिन सच प्राथमिकी और कानून के दायरे में?डीआईजी ने कहा कि मामले में हो रही हें समीक्षा।
दरभंगा पॉक्सो मामला: कथावाचक और मौनी बाबा को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म, लेकिन सच प्राथमिकी और कानून के दायरे में?डीआईजी ने कहा कि मामले में हो रही हें समीक्षा।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा में कथावाचक और चर्चित मौनी बाबा को लेकर इन दिनों तरह–तरह की चर्चाएं जोरों पर हैं। सोशल मीडिया से लेकर आम जनचर्चा तक, यह बातें फैलाई जा रही हैं कि मौनी बाबा की बढ़ती परेशानी के पीछे शिष्यों की भूमिका है या फिर उन्हें भू-माफियाओं ने निशाना बनाया है। हालांकि, इन तमाम अटकलों और अफवाहों के बीच सच्चाई इससे बिल्कुल अलग और कहीं अधिक गंभीर है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि न तो मौनी बाबा से किसी की व्यक्तिगत दुश्मनी है और न ही किसी भू-माफिया के दबाव में उन्हें आरोपी बनाया गया है। पूरा मामला एक नाबालिग बच्ची द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी पर आधारित है, जो कानून और न्याय की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।
महिला थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 182/25 के अनुसार, नाबालिग ने कथावाचक पर दुष्कर्म करने, दवा खिलाकर गर्भपात कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं मौनी बाबा पर अपने केम्पस में नाबालिग की शादी कराने और कई महीनों तक उसे बरगलाने का आरोप है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए इसमें पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें पुलिस की भूमिका अत्यंत संवेदनशील और निर्णायक मानी जाती है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि पॉक्सो जैसे मामलों में यदि पुलिस की किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, या अनुसंधान के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता उजागर होती है, तो न्यायालय सख्त रुख अपनाता है। यहां तक कि यदि कोई पुलिस अधिकारी अपने प्रतिवेदन में आरोपियों को बचाने का प्रयास करता है, तो उस पर भी कार्रवाई की गुंजाइश बन जाती है।
इस पूरे प्रकरण में प्राथमिकी और न्यायालय में दर्ज नाबालिग के बयान पर ही कारवाई सुनिश्चित होगा।न्यायालय में दर्ज बयान में क्या नाबालिग ने कुछ और भी आरोप लगाए हें?यह तो न्यायालय में बहस के उपरांत ही पता चलेगा।
मामले को दूसरा मोड़ देने के प्रयास भी लगातार सामने आ रहा हैं। थाना स्तर से लेकर वरीय पदाधिकारियों तक नाबालिग की उम्र को लेकर उम्र प्रमाण पत्र जुटाने की होड़ मची हुई है। पुलिस की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि लड़की की उम्र 21–22 वर्ष है, जबकि पॉक्सो एक्ट में स्पष्ट प्रावधान है कि उम्र निर्धारण के लिए मैट्रिक प्रमाण पत्र ही मान्य होता है और काफी हें , इसके बावजूद पीएमसीएच को दोबारा पत्र लिखे जाने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं और आने वाले समय में यह वरीय अधिकारियों के लिए किरकिरी का कारण बन सकता है।
इस मामले में दरभंगा क्षेत्र के डीआईजी मनोज तिवारी से हुई बातचीत में पूछने पर उन्होंने कहा कि प्राथमिकी के आलोक में पूरे मामले की समीक्षा की जा रही है और हर बिंदुओ को बारीकी से देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो भी कार्रवाई होगी, वह पूरी तरह न्यायसंगत और कानून के अनुरूप होगी।