आखिर रसूख के आगे क्यूँ झुकती हे दरभंगा पुलिस ? नाबालिग से दुष्कर्म मामले में कार्रवाई शून्य, सवालों के घेरे में महिला थाना।

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

दरभंगा में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले ने पुलिसिया कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। महिला थाना में दर्ज कांड संख्या 182/25 में प्राथमिकी 19 दिसंबर 2025 को दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और न ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई दिखाई दे रही है। हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कहीं रसूख के आगे कानून बेबस तो नहीं हो गया।

इस पूरे मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पीड़ित नाबालिग 3 दिसंबर 2025 को ही थाने पहुंची थी, लेकिन उस दिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पॉक्सो जैसे गंभीर कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज न करना अपने आप में एक दंडनीय लापरवाही मानी जाती है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों पर अब तक कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।

इतना ही नहीं, महिला थाना की थानाध्यक्ष मनीषा कुमारी पर भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। नियमों के विपरीत पॉक्सो मामले में पुरुष अनुसंधानकर्ता की नियुक्ति कर दी गई, जबकि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि ऐसे मामलों की जांच महिला अधिकारी द्वारा ही की जानी चाहिए। प्राथमिकी दर्ज होने के लगभग 30 घंटे बाद, देर रात करीब 10 बजे दो पुरुष पुलिसकर्मियों के साथ एक महिला पदाधिकारी को नाबालिग के घर भेजा गया, जो जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है।हालांकि वरीय पुलिस पदाधिकारी ने पुरुष अनुसंधानकर्ता को बदलकर महिला थानाध्यक्ष को ही इसकी जवाबदेही तय की।

मामले में न्यायालय में पीड़िता का बयान भी पांच दिन बाद दर्ज कराया गया, जिससे जांच की सुस्ती और संवेदनहीनता उजागर होती है। डीआईजी के निर्देश पर एसआईटी गठन की बात कही गई, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक उसका कोई असर नजर नहीं आया।

सबसे हैरानी की बात यह है कि पुलिस जिन कथावाचक और मौनी बाबा को फरार बता रही है, उनके संदेश लगातार सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि दरभंगा पुलिस की तकनीकी शाखा आखिर कर क्या रही है?

शहर में इस मामले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। आम लोगों का साफ कहना है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील और गंभीर अपराध में जिस तेजी और सख्ती की जरूरत होती है, वह यहां पूरी तरह गायब है। लोग खुलकर सवाल कर रहे हैं—क्या पुलिस पर रसूख हावी है? क्या दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है?

अगर ऐसा नहीं है, तो फिर अब तक कथावाचक और मौनी बाबा की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?दूसरों का भविष्य बताने वाले मौनी बाबा कहीं ज्योतिष से अपना भविष्य तो नहीं संवार रहें हे ?

महिला थाना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
इन सवालों के जवाब का इंतजार न सिर्फ पीड़िता, बल्कि पूरा दरभंगा कर रहा है।कुछ पुराने मामले हे जिसमें भी पुलिस रसूख के आगे झुकती नजर दिखाई पड़ी हे।