सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, मिथिला की धरती पर जली आस्था और स्वाभिमान की अखंड ज्योति

दस्तक7मिडिया,कुशेश्वरस्थान/

सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की अखंड सनातन आस्था, शौर्य और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। यही संदेश आज मिथिला के पावन तीर्थस्थल श्री श्री 108 बाबा कुशेश्वरनाथ महादेव मंदिर से पूरे क्षेत्र में गूंज उठा, जहाँ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व श्रद्धा, भक्ति और राष्ट्रीय चेतना के साथ मनाया गया। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के आदेशानुसार आयोजित इस विशेष अवसर पर पंडा समाज एवं न्यास समिति के तत्वावधान में प्रातःकाल विशेष पूजा-अर्चना की गई तथा सायंकाल संपूर्ण मंदिर परिसर को दीपों से आलोकित कर भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ। दीपों की पंक्तियों से सजा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक गौरव से अनुप्राणित दिखाई दिया। इस अवसर पर न्यास समिति के वरिष्ठ सदस्य मणि कान्त झा ने कहा कि“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उद्देश्य इसे केवल गुजरात या सोमनाथ तक सीमित न रखकर, पूरे देश—विशेष रूप से बिहार—में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक स्वाभिमान का सामूहिक उत्सव बनाना है।”उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों को स्मरण कराते हुए कहा कि जनवरी 1026, आज से ठीक एक हजार वर्ष पूर्व, सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण हुआ था। इसके बाद भी इस पावन ज्योतिर्लिंग पर अनेक आक्रमण हुए, किंतु सनातन आस्था कभी विचलित नहीं हुई। प्रत्येक विनाश के बाद भारत की सांस्कृतिक चेतना और अधिक प्रखर हुई तथा सोमनाथ मंदिर का पुनरुद्धार होता रहा। आज सोमनाथ मंदिर भारतीय आत्मसम्मान, सांस्कृतिक एकता और अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक बनकर खड़ा है। कार्यक्रम में न्यास समिति के सदस्य संतोष पोद्दार, शंकर चौपाल, छेदी कुमार राय, न्यास की कोषाध्यक्ष कविता कुमारी, मंदिर के पुजारी पंडा रणजीत झा उर्फ बाली झा, रोशन कुमार झा, सरोज झा, पंडित झा, संतोष झा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।