फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार व मुशायरा में गूंजी शायरी, उर्दू हमारी साझा तहज़ीब की पहचान : डीएम
फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार व मुशायरा में गूंजी शायरी, उर्दू हमारी साझा तहज़ीब की पहचान : डीएम
फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार व मुशायरा में गूंजी शायरी, उर्दू हमारी साझा तहज़ीब की पहचान : डीएम
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
उर्दू भाषा के संरक्षण, विकास और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रेक्षागृह, दरभंगा में शनिवार को फ़रोगे-ए-उर्दू सेमिनार, जिला स्तरीय कार्यशाला एवं मुशायरा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उर्दू निदेशालय, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग, पटना एवं जिला प्रशासन, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी कौशल कुमार, उप विकास आयुक्त श्री स्वप्निल, प्रभारी पदाधिकारी जिला उर्दू कोषांग श्री आनंद कुमार, प्रो. मुश्ताक अहमद (प्राचार्य, सीएम कॉलेज), प्रो. फ़ैज़ अहमद (मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी) एवं डॉ. मंजर सुलेमान द्वारा संयुक्त रूप से शमा रोशन कर किया गया। इस अवसर पर जिला उर्दू नामा का भी विमोचन किया गया।
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उर्दू भाषा की जीवंत परंपरा, प्रेम, सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। उन्होंने उर्दू प्रेमियों, शिक्षकों, विद्वानों और कवियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि बिहार सरकार उर्दू भाषा के विकास और संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि उर्दू बिहार की द्वितीय राज्य भाषा होने के साथ-साथ हमारी साझा तहज़ीब की मधुर अभिव्यक्ति भी है। इसकी भाषा में शालीनता, लहजे में मिठास और भावों में अपनापन है, जिसने सदियों से लोगों के दिलों को जोड़े रखा है। जिला उर्दू भाषा कोषांग के माध्यम से उर्दू के उत्थान हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि दरभंगा ऐतिहासिक रूप से उर्दू अदब, शायरी और तहज़ीब का एक प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ उर्दू से प्रेम करने वालों की बड़ी संख्या है, जो इसे केवल भाषा नहीं, बल्कि अपने जीवन का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने दाग़ देहलवी के शेर का उल्लेख करते हुए उर्दू की लोकप्रियता और व्यापक स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला में उर्दू के विशिष्ट विद्वानों, डेलिगेट्स, कवियों एवं छात्र-छात्राओं ने अपने विचार और प्रस्तुतियाँ रखीं। नई पीढ़ी के प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की भी सराहना की गई।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मो. जसीमुद्दीन, उर्दू अनुवादक, जिला उर्दू भाषा कोषांग द्वारा किया गया।
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