जे.के. कॉलेज में छात्र राजनीति की नई हलचल, समस्याओं के समाधान की उम्मीद बना ‘मिथिला स्टूडेंट यूनियन’
जे.के. कॉलेज में छात्र राजनीति की नई हलचल, समस्याओं के समाधान की उम्मीद बना ‘मिथिला स्टूडेंट यूनियन’
जे.के. कॉलेज में छात्र राजनीति की नई हलचल, समस्याओं के समाधान की उम्मीद बना ‘मिथिला स्टूडेंट यूनियन’
दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।
बिरौल के जे.के. कॉलेज परिसर में इन दिनों छात्र राजनीति का एक नया स्वरूप देखने को मिल रहा है। ‘मिथिला स्टूडेंट यूनियन’ द्वारा चलाए जा रहे सदस्यता अभियान ने न केवल कॉलेज के शैक्षणिक माहौल में हलचल पैदा की है, बल्कि छात्रों को अपनी समस्याओं के लिए एक संगठित मंच भी प्रदान किया है। अभियान के तीसरे दिन छात्रों की भारी भीड़ यह दर्शाती है कि युवा अब केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि कैंपस की व्यवस्थाओं में बदलाव के भी आकांक्षी हैं।
मुद्दों पर आधारित राजनीति की ओर बढ़ते कदम
अक्सर छात्र संगठनों पर केवल हंगामे का आरोप लगता है, लेकिन इस अभियान के दौरान छात्र नेता सत्यम सिंह ने संघर्ष और सेवा का खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनियन का लक्ष्य केवल सदस्य बनाना नहीं, बल्कि कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक प्रशासनिक और सामाजिक जवाबदेही तय करना है। छात्रों ने केवल फॉर्म नहीं भरे, बल्कि अपनी दबी हुई शिकायतों को भी स्वर दिया। संवाद के दौरान कुछ प्रमुख मुद्दे उभर कर सामने आए, जिसमें नामांकन और परीक्षा परिणामों में होने वाली देरी। कैंपस में स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था की कमी। सोनू मंडल, किशन कुमार झा, राहुल कुमार और मनोहर यादव जैसे कार्यकर्ताओं की सक्रियता ने आम छात्र-छात्राओं के भीतर विश्वास जगाया है। यूनियन का दावा है कि यह सदस्यता अभियान आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन की नींव रखेगा, जो सीधे तौर पर छात्र हितों की रक्षा करेगा। बिरौल के जे.के. कॉलेज में चल रहा यह अभियान मात्र एक संगठनात्मक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह उन छात्रों की आवाज़ है जो वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन इन छात्रों के भरोसे को धरातल पर कितनी मजबूती से उतार पाती है।