स्थानीय लोंगों का सवाल :ताजपुर थाना अध्यक्ष इंसान हे या वर्दी में गुंडा ?, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय लोंगों का सवाल :ताजपुर थाना अध्यक्ष इंसान हे या वर्दी में गुंडा ?, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
स्थानीय लोंगों का सवाल :ताजपुर थाना अध्यक्ष इंसान हे या वर्दी में गुंडा ?, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
दस्तक 7मीडिया /
समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना में पदस्थापित थानेदार और पुलिसकर्मियों की कार्यशैली को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। थाना क्षेत्र में इन दिनों यह चर्चा आम है कि पुलिस कानून के रक्षक के रूप में काम कर रही है या फिर वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी कर रही है।
मामला ताजपुर थाना क्षेत्र स्थित “सोनी फैंसी” नामक दुकान से जुड़ा है, जहां करीब 25 किलो चांदी चोरी होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि 29 दिसंबर की देर रात दुकान में चोरी हुई। घटना के बाद दुकानदार जैकी अहमद को अपने ही कर्मचारियों पर शक हुआ और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी।पुलिस ने पीड़ित और अन्य के घर छापेमारी की लेकिन कुछ नहीं मिला।
आरोप है कि पुलिस ने दुकान के कर्मचारी मनीष कुमार को थाने बुलाकर पूछताछ की और पहले छोड़ दिया, लेकिन बाद में दोबारा थाने ले जाकर उसे लगभग चार दिनों तक अवैध रूप से थाने में रखा गया। इस दौरान उसके साथ मारपीट और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना की गई ,अगर थानाध्यक्ष ने पीड़ित को चार दिनो तक थाने में रखा तो क्या कानून इसकी इजाजत देता हे ?अगर मान भी ले कि इन सभी ने चोरी किया तो पुलिस या दुकान मालिक को इतनी बेरहमी से पीटने का अधिकार किसने दे दिया ?
मनीष के परिजनों का दावा है कि थाने से लौटने के बाद दुकानदार जैकी अहमद उसे छत पर ले गया, जहां उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालकर बगल में छेद कर दिया , जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। पहले स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया, लेकिन स्थिति नाजुक होने पर उसे पटना रेफर किया गया, जहां फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे इस पूरे घटनाक्रम के गवाह हो सकते हैं। वहीं, यदि दुकानदार द्वारा इस तरह का कुकृत्य किया गया है, तो पुलिस को चाहिए कि तत्काल दुकानदार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजने की जरूरत हे ।उसे किसने इजाजत दिया कि किसी के प्राईवेट पार्ट के बगल में सुई से छेदकर पेट्रोल डाल दे यह पुरा आपराधिक कृत्य हे।
90 हजार लेकर छोड़े जाने का भी आरोप
इसी बीच ताजपुर थाने पर एक और गंभीर आरोप और सामने आया है। पीड़ितों का दावा है कि चोरी के मामले में एक दुकानदार समेत तीन लोगों को थाने में घंटों बैठाकर बेरहमी से पीटा गया और 90 हजार रुपये लेने के बाद उन्हें छोड़ा गया। यह भी आरोप लगाया गया है कि चोरी की एफआईआर में गलत कांड संख्या दर्ज की गई है।हालांकि रुपये लेन देंन का कोई ठोस सबूत नहीं हे।
मनीष के परिजनों के अनुसार, उसके घर पर ताला लटका मिला, जिससे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया। परिजनों का कहना है कि पुलिस लगातार दबाव बनाकर पैसे की मांग कर रही थी।
इलाके में आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। पीड़ित परिवार ने वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज की जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ताजपुर थाना की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर बहस छेड़ दी है।