आधी रात, ठिठुरती ठंड और ‘देवदूत’ बनकर पहुंचे बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी शशांक राज,

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

जब पूरा अनुमंडल भीषण शीतलहर के कारण अपने घरों में दुबक कर रजाई की गर्माहट में सो रहा था, तब बिरौल के अनुमंडल पदाधिकारी शशांक राज कड़ाके की ठंड में कांप रहे बेसहारा लोगों का दर्द बांटने सड़कों पर थे। मानवता और कर्तव्य के इस संगम ने बिरौल में प्रशासन के प्रति एक नई उम्मीद जगाई है।
अक्सर अधिकारी फाइलों और दफ्तरों तक सीमित रहते हैं, लेकिन शशांक राज ने इस धारणा को बदल दिया। वे स्वयं बस स्टैंड, हाट गाछी और कोठी पुल जैसे इलाकों में पहुंचे। उन्होंने केवल कंबल बांटे ही नहीं, बल्कि जमीन पर सो रहे दिव्यांगों और बुजुर्गों के पास खुद झुककर उन्हें कंबल ओढ़ाए। यह दृश्य दर्शाता है कि एक सच्चा लोक सेवक जनता से कितना जुड़ा हो सकता है।


कंबल वितरण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी
ने पाया कि कई लोग केवल ठंड ही नहीं, बल्कि भूख से भी लड़ रहे थे। उन्होंने तत्काल दर्जनों लोगों के बीच कंबल बल के साथ जरुरतमंदों के हाथों में भोजन दिये।इस दौरान सड़क किनारे सो रहे एक बुजुर्ग ने भावुक होते हुए कहा, “साहब ने हमें इस ठंड में से बचा लिया।” स्थानीय लोगों का मानना है कि शशांक राज की यह पहल केवल सरकारी कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रशासन का वह ‘मानवीय चेहरा’ है जिसकी आज समाज को सबसे अधिक जरूरत है।