9–10 वर्षीय छात्र कश्यप की मौत ,आत्महत्या या साजिश?माउंट समर कॉन्वेंट स्कूल मामला, रसूखदारों के आगे क्या बेबस हुई व्यवस्था ,पुलिस ने कहा पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताता हे फांसी पर लटक गया कश्यप ?

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

माउंट समर कॉन्वेंट स्कूल में कुछ माह पूर्व 9–10 वर्षीय छात्र कश्यप की संदिग्ध मौत का मामला आज भी कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस द्वारा इसे जल्दबाजी में आत्महत्या घोषित किए जाने पर अब आम लोगों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों में भी गहरा संदेह जताया जा रहा है। सवाल यह है कि क्या यह मामला बड़े रसूखदारों के दबाव में दबा दिया गया?

क्या 9–10 साल का बच्चा आत्महत्या का निर्णय ले सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र के बच्चों में आत्महत्या जैसी सोच का विकसित होना अत्यंत दुर्लभ है।इसके बावजूद मामले की गहन वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक जांच की कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई।

शिक्षक-चिकित्सक-प्रशासन गठजोड़ पर गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में  कई बड़े निजी स्कूलों के प्रबंधक आपस में क्लब और लॉबी बनाकर जुड़े हुए हैं इन क्लबों में चिकित्सक, स्कूल संचालक और प्रभावशाली लोग सदस्य हैं कई चिकित्सक स्वयं स्कूल, होटल और रियल एस्टेट का व्यवसाय कर रहे हैं ,और इसी नेटवर्क के ज़रिये पोस्टमार्टम रिपोर्ट को प्रभावित करने, जांच की दिशा मोड़ने ,और पुलिस पर दबाव बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

लोगों का सवाल है कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट निष्पक्ष थी?
क्या मेडिकल रिपोर्ट भी इसी कथित गठजोड़ का हिस्सा बन गई?क्या सच को आत्महत्या बताकर दफना दिया गया?

रसूखदारों के साथ दिखते हैं अधिकारी

चर्चा है कि जिले के कुछ वरीय पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी
,स्कूल प्रबंधन से सामाजिक और व्यक्तिगत रूप से जुड़े हुए हैं
ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना कितना व्यवहारिक है, यह बड़ा सवाल है।वजह यह भी बताया जा रहा हे कि बड़े बड़े पदाधिकारियों के बच्चे किसी ना किसी स्कूल में पढ़ते हे।

कश्यप की मां को नहीं मिला न्याय, टूट गई उम्मीद

स्थानीय लोगों का कहना है कि न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते कश्यप की मां मनीषा मानसिक रूप से टूट गईं ,कुछ दिन पहले उन्होंने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली, यह घटना पूरे सिस्टम पर मानवता के प्रश्नचिह्न लगाती हे।यहीं से कानून व्यवस्था पर भरोसा डगमगाता है और आम आदमी खुद को असहाय महसूस करता है।

मामले की उच्चस्तरीय या न्यायिक जांच,पोस्टमार्टम रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा,स्कूल प्रबंधन, चिकित्सक और अधिकारियों के आपसी संबंधों की जांच,पीड़ित परिवार को न्याय और दोषियों को सज़ा की मांग आम जनता कर रही हे।यह मामला सिर्फ एक बच्चे की मौत नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, प्रशासन और समाज के नैतिक पतन का आईना बनता जा रहा है।