दरभंगा में कानून का दोहरा चेहरा: आम पर सख्ती, खास पर खामोशी,हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई शून्य, सवालों के घेरे में पुलिस–प्रशासन ?
दरभंगा में कानून का दोहरा चेहरा: आम पर सख्ती, खास पर खामोशी,हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई शून्य, सवालों के घेरे में पुलिस–प्रशासन ?
दरभंगा में कानून का दोहरा चेहरा: आम पर सख्ती, खास पर खामोशी,हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई शून्य, सवालों के घेरे में पुलिस–प्रशासन ?
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
दरभंगा जिले में आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है? या फिर रसूखदारों और प्रभावशाली लोगों के लिए नियम अलग हैं। बीते कुछ वर्षों की घटनाओं पर नजर डालें तो यह सवाल यूं ही नहीं उठ रहा।
ताजा मामला महिला थाना में दर्ज एक रसूखदार कथा वाचक और उनके गुरु मौनी बाबा की हे ,जहां पॉक्सो जैसे गंभीर मामले को मजाक बनाकर रख दिया गया ,कई दिन बीत जाने के बाद ना तो लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों पर कारवाई हुई ,ना ही आरोपी की गिरफ्तारी हुई ?
डीएमसीएच परिसर का वायरल वीडियो आज भी लोगों को याद है, जिसमें कथित तौर पर चिकित्सक शराब का सेवन करते दिखे थे। तात्कालीन डीएसपी सदर के नेतृत्व में छापेमारी हुई, शराब बरामद भी हुई, बेता थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई।लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एक भी चिकित्सक पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया।
जवाहर नवोदय विद्यालय में एक छात्र की संदिग्ध मौत ने भी कई सवाल छोड़े। परिजनों ने हत्या की साजिश का आरोप लगाया, जबकि स्कूल प्रबंधन ने आत्महत्या की बात कही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘हैंगिंग’ लिख दिया गया और स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे अचानक “खराब” बताए गए। जांच आगे बढ़ी या नहीं ,इसका जवाब आज भी धुंधला है।
यही कहानी माउंट समर कॉन्वेंट में भी दोहराई गई। 9–10 साल के बच्चे की मौत, स्कूल प्रबंधन का आत्महत्या का दावा, प्राथमिकी दर्ज, पोस्टमार्टम में फिर ‘हैंगिंग’, और सीसीटीवी कैमरे फिर से “खराब”। न्याय की आस में भटकती मां ने शोक में जहर खाकर जान दे दी। पुलिस आज भी कहती है ,मामला अनुसंधानाधीन है।
इन घटनाओं की कड़ी जोड़कर देखें तो एक ही पैटर्न सामने आता है , आरोपी प्रभावशाली हों तो जांच सुस्त ,सबूत खोजने की कोशिश नहीं ,तो कार्रवाई शून्य ?सीसीटीवी हों तो “खराब”,और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में एक ही शब्द “हैंगिंग”।हैंगिंग का स्पष्ट कारण क्या हो सकता हे ,क्या 9-10वर्ष का बच्चा फांसी पर झूल कर लटक सकता हे ?अगर लटका भी दिया गया तो भी रिपोर्ट” हेन्गिग “ही होगा क्यूंकि सीसीटीवी नदारद ,और ऐसा करने वाले लोग क्या पुलिस के लिये साक्ष्य छोड़ेंगे ,अगर साक्ष्य भी मिल गया तो रात के अंधेरे में क्या डील नहीं हो सकती ?
आम लोगों का कहना है कि यदि यही घटनाएं किसी सामान्य परिवार या आम व्यक्ति से जुड़ी होतीं, तो अब तक गिरफ्तारी भी हो चुकी होती और त्वरित कार्रवाई भी। यही वह बिंदु है जहां जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से डगमगाने लगता है।