यह एक गंभीर विषय है। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सार्वजनिक विकास कार्यों में भी बाधा,

सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा का ‘राज’,अंचल प्रशासन की चुप्पी ने खड़े किए कई गंभीर सवाल, लोजपा नेता राजकुमार झा किया मुक्त कराने की मांग

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

दरभंगा। जिले के गौड़ा बौराम प्रखंड अंतर्गत बरदाहा में सरकारी भूमि पर हो रहे अवैध कब्जे ने अंचल प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। बिहार सरकार और भारत सरकार की कीमती जमीनों पर अवैध कब्जा का बढ़ता वर्चस्व अब आम चर्चा का विषय बन गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि रक्षक की भूमिका निभाने वाला अंचल प्रशासन मौन साधे बैठा है।


गौड़ा बौराम प्रखंड लोजपा अध्यक्ष राजकुमार झा
का आरोप है कि बरदाहा और आसपास के इलाकों में सरकारी जमीनों पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य और कब्जे किए जा रहे हैं। नियमतःअंचल प्रशासन को इन भूमियों की रक्षा करनी चाहिए और अतिक्रमणकारियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। इसके उलट, प्रशासन की सुस्ती यह संकेत दे रही है कि कहीं न कहीं ‘ऊपर से नीचे तक’ सब कुछ पूर्व-नियोजित है।
आखिर क्यों अंचल प्रशासन इन अवैध कब्जों को मुक्त कराने के बजाय मूकदर्शक बना हुआ है? क्या भू-माफियाओं को मिली यह ‘खुली छूट’ किसी बड़े आर्थिक लेन-देन का नतीजा है? क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि अंचल कार्यालय के कुछ रसूखदार कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। यह “लेन-देन का खेल” अब उच्च स्तरीय जांच का एक बड़ा विषय बन चुका है। लोजपा अध्यक्ष श्री झा ने कहा कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के कारण भविष्य में स्कूल, अस्पताल या खेल के मैदान जैसे सार्वजनिक प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन की कमी हो सकती है। अंचल प्रशासन की संदिग्ध भूमिका से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो कीमती सरकारी संपत्ति भू-माफियाओं की निजी जागीर बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला अब केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार की एक गहरी जड़ की ओर इशारा कर रहा है।