महिला थाना में दर्ज दुष्कर्म कांड (182/25) में लापरवाही के गंभीर आरोप, अगर जांच में दोषी पायी गई तो थानाध्यक्ष व अपर थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की आशंका,

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

महिला थाना में दर्ज दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े कांड संख्या 182/25 में महिला थानाध्यक्ष और अपर थानाध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इस मामले में पीड़िता की मां हीरा देवी ने वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को आवेदन देकर महिला थाना की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामले में पुलिस पदाधिकारियों द्वारा लापरवाही बरती गई, जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

पीड़िता की मां द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, अपर थानाध्यक्ष मधुबाला को पीड़िता ने तीन दिसंबर 2025 को ही आवेदन दिया था, लेकिन उन्होंने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय आवेदन में सुधार कर पुनः देने की बात कहकर मामले को टाल दिया। वहीं, महिला थानाध्यक्ष पर आरोप है कि उन्होंने नाबालिग पीड़िता के बयान पर प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन अनुसंधान के लिए पुरुष अनुसंधानक की नियुक्ति कर दी, जो पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ है।

इतना ही नहीं, महिला थानाध्यक्ष द्वारा घटना स्थल के निरीक्षण के लिए एक महिला पुलिस पदाधिकारी के साथ दो पुरुष पुलिसकर्मियों को भेज दिया , जिसे भी पॉक्सो नियमों का उल्लंघन बताया गया है। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि तीन दिसंबर 2025 को एक मीडिया कर्मी ने थाना परिसर में ही नाबालिग पीड़िता का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया। यह घटना नाबालिग की पहचान उजागर करने से जुड़ी गंभीर लापरवाही मानी जा रही है, जो कानूनन अपराध की श्रेणी में आती है।

पीड़िता की मां ने यह भी आरोप लगाया है कि कथावाचक और मौनी बाबा जैसे प्रभावशाली आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं होने से महिला थाना की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि महिला थानाध्यक्ष ने दोनों आरोपियों को बचाने के लिए नाबालिग को बार-बार परेशान किया और जानबूझकर जांच प्रक्रिया को धीमा किया गया। प्राथमिकी 19 दिसंबर 2025 को दर्ज होने के बावजूद मेडिकल जांच और बीएनएसएस की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराने में करीब पांच दिन की देरी की गई, जिससे प्रतीत होता हे कि आरोपियों को बचने का मौका दे दिया गया,यही नहीं जब प्राथमिकी 19दिसंबर को दर्ज हुई तो 20दिसंबर की देर रात पीड़िता के घर एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ दों पुरुष को घटना स्थल पर जाने का क्या मतलब ,दिन में भी यें अधिकारी घटना स्थल देख सकते थे।

आवेदन में यह भी बताया गया है कि आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए डीआईजी स्तर से एसआईटी (विशेष जांच टीम) के गठन की मांग की गई है। पीड़िता की मां का कहना है कि पूरे मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध में सिस्टम पूरी तरह फेल होता दिख रहा है।

पीड़िता की मां ने एसएसपी से मांग की है कि प्रथमदृष्टया दोनों आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए और महिला थानाध्यक्ष व अपर थानाध्यक्ष की लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि पुलिस की उदासीनता के कारण पीड़ित नाबालिग को न्याय के बजाय और अधिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है।

वहीं, वरीय पुलिस अधीक्षक ने पीड़िता की मां को आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो दोषी पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।