दरभंगा में नाबालिग दुष्कर्म कांड के मामले में दबाव, धमकी और साजिश के बीच फंसी पीड़िता, सुरक्षा व निष्पक्ष जांच की उठी मांग,आरोपियों के गिरफ्तारी नहीं होने से उठ रहें हें सवाल ?

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

दरभंगा में नाबालिग से दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में प्राथमिकी दर्ज होने और पीड़िता के न्यायालय में बयान के बाद भी उसकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उल्टे, अब पीड़ित नाबालिग और उसके परिवार पर लगातार दबाव, धमकी और मानसिक उत्पीड़न का आरोप सामने आ रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि न्याय की उम्मीद लगाए बैठी पीड़िता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।खुद को महिलाओं की हितेषी कहने वाली एक महिला संगठन भी नाबालिग पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हें।

सूत्रों के अनुसार, एक महिला संगठन से जुड़ी कार्यकर्ता पर आरोप है कि वह नाबालिग को यह कहकर धमका रही है कि “अगर हमारी बात नहीं मानी तो तुम्हारे खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।” इतना ही नहीं, पीड़िता को यह कहकर बहलाने की भी कोशिश की जा रही है कि “हमसे मिलो, सब ठीक हो जाएगा।” इन हरकतों से नाबालिग पर गंभीर मानसिक दबाव पड़ रहा है।जबकि यही महिला संगठन उसे बरगलाकर एक साल तक नाबालिग को प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी लगाई और बाद में न्याय दिलाने के बजाय उस पर ही दाग लगा दिया और बदनाम कर दिया ?

बताया जा रहा है कि कई रसूखदार लोग भी मामले को प्रभावित करने की कोशिश में जुटे हैं। कहीं पैसे का लालच, तो कहीं खुली धमकी ,पीड़िता का मुंह बंद कराने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन महिला संगठनों ने महीनों तक नाबालिग को यह भरोसा दिलाया कि वे उसे न्याय दिलाएंगे, वही अब उसके खिलाफ अनर्गल बयान देने लगे हैं। इससे ऐसे संगठनों की नीयत और भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि महिला थाना पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। 3 दिसंबर 2025 को आवेदन देने के बावजूद तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। आखिरकार 19 दिसंबर को मामला दर्ज हुआ। इसके बाद 20 दिसंबर की रात करीब 10 बजे एक महिला पुलिसकर्मी और दो अन्य जवान कथित रूप से बयान लेने या घटनास्थल देखने पहुंचे। मेडिकल जांच और न्यायालय में बयान भी देरी से कराए गए।

इन तमाम घटनाक्रमों से यह प्रतीत होता है कि संगठित तरीके से एक नाबालिग को परेशान किया जा रहा है। पीड़िता और उसके परिवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी पुलिस पदाधिकारियों और दबाव बनाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गौरतलब है कि पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण का मामला संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तारी कर सकती है। इसके बावजूद अब तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। महिला थाना में कथा वाचक और मौनी बाबा पर मामला दर्ज हुआ है, वहीं अनुसंधान के दौरान करीब आधा दर्जन अन्य लोगों को अप्राथमिकी अभियुक्त बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिन्होंने कथित रूप से लंबे समय तक नाबालिग को बरगलाया ,सूत्रों के अनुसार न्यायालय में दर्ज BNSS183 के तहत दर्ज बयान में इन सभी के नाम भी बताए गये हें  ।

पीड़िता की सबसे बड़ी जरूरत इस समय सुरक्षा और निष्पक्ष न्याय है। सवाल यह है कि जब दबंग, पैसे और प्रभाव के बल पर कानून को मोड़ने की कोशिश हो रही हो, तब एक नाबालिग को न्याय कैसे मिलेगा? अब निगाहें प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर टिकी हैं कि क्या पीड़िता को समय रहते सुरक्षा और इंसाफ मिल पाएगा या नहीं।