भगवान का मार्ग या सांसारिक मोह? मौनी बाबा की तस्वीरों ने खोली बहस ,धर्म की आड़ में प्रभाव-विस्तार? मौनी बाबा की गतिविधियां जांच के घेरे में ??
भगवान का मार्ग या सांसारिक मोह? मौनी बाबा की तस्वीरों ने खोली बहस ,धर्म की आड़ में प्रभाव-विस्तार? मौनी बाबा की गतिविधियां जांच के घेरे में ??
भगवान का मार्ग या सांसारिक मोह? मौनी बाबा की तस्वीरों ने खोली बहस ,धर्म की आड़ में प्रभाव-विस्तार? मौनी बाबा की गतिविधियां जांच के घेरे में ??
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
मौनी बाबा” यह शब्द आमजन की सोच में त्याग, तपस्या, संयम और अध्यात्म का प्रतीक माना जाता है। समाज ऐसे बाबा को न केवल आदर देता है, बल्कि कई बार उन्हें ईश्वरतुल्य मान बैठता है। लेकिन जब यही उपाधि धारण करने वाला व्यक्ति सांसारिक चमक-दमक, राजनीतिक संपर्क और प्रचार-प्रसार में लिप्त दिखाई दे, तो सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है।
दरभंगा के चर्चित मौनी बाबा इन दिनों इसी कारण चर्चा और विवाद के केंद्र में हैं। मौनी बाबा की उपाधि ग्रहण करने के बाद उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अध्यात्म में लीन रहें, लेकिन इसके उलट उनकी गतिविधियां कुछ और ही संकेत देती नजर आ रही हैं।
सोशल मीडिया पर मौनी बाबा की कई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें वे बड़े-बड़े नेताओं, मंत्रियों, विधायकों, सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या मौन व्रत और तपस्या का दावा करने वाले संत का इस तरह सार्वजनिक प्रचार-प्रसार करना धर्मसम्मत है?
धार्मिक गुरुओं का दायित्व समाज को भटके मार्ग से सही दिशा दिखाना होता है, न कि सत्ता और प्रभावशाली लोगों के साथ नजदीकियां बढ़ाना। ऐसे में यह प्रश्न और भी गहराता है कि मौनी बाबा को नेताओं और रसूखदार लोगों से मिलने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ रही है?
इस संवाददाता से बातचीत में मौनी बाबा ने दावा किया कि वे वर्ष 1997 में “खो” (भूमिगत सुरंग) में जाकर तपस्या में लीन हो गए थे और वर्ष 2009 में तपस्या पूर्ण कर बाहर आए। लेकिन जो व्यक्ति स्वयं को ईश्वर से जोड़ चुका हो, उसका बाहरी दुनिया और सत्ता-प्रतिष्ठान से इतना सरोकार क्यों?
तस्वीरों में मौनी बाबा की बढ़ती सार्वजनिक उपस्थिति यह आशंका भी पैदा करती है कि कहीं यह सब किसी और उद्देश्य की पूर्ति का माध्यम तो नहीं। क्या यह प्रभाव-विस्तार का प्रयास है, या फिर किसी संभावित विवाद अथवा गतिविधियों को ढकने की रणनीति?
दस्तक 7 मीडिया इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने में जुटी है। मौनी बाबा की चुप्पी और उनके सार्वजनिक आचरण के बीच का यह विरोधाभास अब जनता के सामने है और जवाब की मांग भी।यह सवाल इसीलिये कि एक नावालिग से दुष्कर्म का आरोप इनके शिष्य पर जब लगा तो इन्होंने सारी सीमाएं उस शिष्य को बचाने में झोंक दी और वह नाबालिग लड़की दर दर भटकने के बाद महिला थाना में केस दर्ज की हें जिसमें शिष्य और गुरु को आरोपी बनाया गया हें।शिष्य पर दुष्कर्म का आरोप हें तो गुरु पर साक्ष्य छुपाने यानि नाबालिग को बरगलाने का ?क्या एक बाबा को ऐसा करना चाहिये ?हालांकि मौनी बाबा कहते हें कथा वाचक श्रवण दास जैसे उनके हजारों शिष्य हें।कई नामचीन जैसे आसाराम बापू ,राम रहीम जैसे धर्म गुरु बने जिनपर दुष्कर्म के आरोप लगे और उन्हें जेल जाना पड़ा ,संगत तो इन गुरुओं का भी बड़े बड़े नेता और मंत्रियों से था ?