नाबालिग दुष्कर्म मामले में महिला थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे सवाल ??रात के दस बजे पीड़िता के घर क्यूँ पहुंची पुलिस ,नाबालिग थी,पीड़ित थी , कोई अपराधी नहीं??एफआईआर ,जांच और कानून सभी कटघरे में।पुलिस मुख्यालय भी नहीं देता इसकी इजाजत ,क्यूंकि नाबालिग से दुष्कर्म का हें मामला ?
नाबालिग दुष्कर्म मामले में महिला थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे सवाल ??रात के दस बजे पीड़िता के घर क्यूँ पहुंची पुलिस ,नाबालिग थी,पीड़ित थी , कोई अपराधी नहीं??एफआईआर ,जांच और कानून सभी कटघरे में।पुलिस मुख्यालय भी नहीं देता इसकी इजाजत ,क्यूंकि नाबालिग से दुष्कर्म का हें मामला ?
नाबालिग दुष्कर्म मामले में महिला थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे सवाल ??रात के दस बजे पीड़िता के घर क्यूँ पहुंची पुलिस ,नाबालिग थी,पीड़ित थी , कोई अपराधी नहीं??एफआईआर ,जांच और कानून सभी कटघरे में।पुलिस मुख्यालय भी नहीं देता इसकी इजाजत ,क्यूंकि नाबालिग से दुष्कर्म का हें मामला ?
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय
नाबालिग लड़की के दुष्कर्म के मामले में महिला थाना पुलिस के कार्यशैली पर कई प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहें हें ,सवाल यही कि महिला थानाध्यक्ष मनीषा कुमारी क्या थानाध्यक्ष के लायक हें या फिर प्रशिक्षण की जरूरत हें ,अगर ऐसा नहीं हें तो शनिवार की रात दस बजे में नाबालिग के घर में घटनास्थल देखने या पूछताछ करने कैसे एक महिला पदाधिकारी के साथ दों पुरुष उसके घर पहुंच गये ?
इस ऑडियो में सुना जा सकता हें पीड़िता के परिजन और पुरुष पुलिस पदाधिकारी का आवाज ,पता पूछ रहें हें
नाबालिग का कसूर बस इतना हें कि उसके साथ हुये दुष्कर्म या कथित दुष्कर्म के मामले में न्याय मांगने महिला थाना पहुंची थी और दों लोंगों को आरोपी बनाया था। नाबालिग ने शुक्रवार को थाने में आवेदन दिया था लेकिन थाना अध्यक्ष ने उस दिन प्राथमिकी दर्ज नहीं किया ,नये आपराधिक कानून में यह भी महिला थानाध्यक्ष की लापरवाही हें ,दस्तक 7मीडिया में खबर छपने के बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ी और आनन फानन में शनिवार को प्राथमिकी दर्ज हुई लेकिन प्राथमिकी में तिथि शुक्रवार के दिन ही यानि 19दिसंबर 25दिया गया।
शुक्रवार के दिन करीब तीन बजे उक्त नाबालिग ने थाना में अगर आवेदन दिया था तो अब यहां एक सवाल हें ,अगर थानाध्यक्ष ने शुक्रवार यानि 19दिसंबर 25को प्राथमिकी दर्ज की हें तो नियमानुसार उसी दिन घटना स्थल पर पदाधिकारी को भेजना चाहिये था ,अगर उस दिन नहीं भेज पायी तो 20दिसंबर 25के दिन में पुलिस पदाधिकारी को भेजना चाहिये फिर दस बजे रात में पीड़िता के घर पुलिस क्यूँ पहुंची ,यह अहम सवाल हें और पुलिस के कार्यशैली पर प्रश्न खड़ा करता हें ,कहीं ऐसा तो नहीं कि पीड़िता पर दबाव बनाने के लिये रात में एक महिला पदाधिकारी के साथ दों पुरुष पुलिस कर्मी गये थे ताकि पुलिस का डर हो ?
कानून भी कहता हें कि सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी और तलाशी के लिये या तो वारंट चाहिये या फिर मजिस्ट्रेट की अनुमति, लेकिन इन बातों का कोई ख्याल रखा नहीं गया ?महिला थानाध्यक्ष खुद रविवार को घटनास्थल पर गई थी और पीड़िता एवं उसके परिजन से पूछताछ कर लौटी हें।
इससे भी बड़ी बात यह हें कि महिला थाना अध्यक्ष ने नाबालिग के मां के द्वारा दिये आवेदन पर जो प्राथमिकी (182/25)दर्ज की हें उसमें अनुसंधानक संजीव कुमार रजक को बनाया गया हें जबकि वह पुरुष हें। कोई पुरुष अनुसंधान के क्रम में किसी नाबालिग से कैसे दुष्कर्म के मामले सवाल पूछ सकता हें इससे अनुसंधान प्रभावित होगा ?और कोई लड़की इस मामले में खुलकर पुलिस पदाधिकारी को नहीं बताएगी।
यहां बता दे कि कुछ साल पहले जब महिला थाना का नींव रखा गया था तो पुरुष भी अनुसंधानक होते थे लेकिन नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उस समय भी कोई पुरुष अनुसंधानक नहीं होता था। फिर अब कैसे पुरुष अनुसंधानक बना दिया गया ,नये कानून में भी इसकी गुंजाईश नहीं दी गयी हें। सवाल तो यह भी हें??
जबकि ऐसे गंभीर मामले में पुलिस मुख्यालय भी शख्त हें।
इससे भी अहम सवाल यह हें कि नाबालिग की मां और नाबालिग तीन दिसंबर को महिला थाना जाकर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिये आवेदन दी थी। सूत्रों का कहना हें कि थाना में यह आवेदन पड़ते ही कुछ ही मिनटों में दोनों आरोपी को सूचना मिल गई और उस दिन थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई ,पीड़िता को यह कहकर वहां से विदा कर दिया गया कि इस आवेदन को सुधारकर दीजिये ,फिर प्राथमिकी दर्ज होगी ?नाबालिग और उसके परिजन महिला थाना से वापस चली गई। उसके बाद सूत्र बताते हें कि इस प्राथमिकी के आरोपी लोग नाबालिग और परिजन पर हावी हो गये इस कारण नाबालिग थाना नहीं आयी ,सूत्रों के द्वारा कहा जा रहा हें नाबालिग के थाना नहीं आने के कारण उसके परिजनों को थाना से नोटिस भी किया गया था यह भी जांच का विषय हें। तीन दिसंबर 25के सीसीटीवी में अगर देखा जाय तो थाने का सीसीटीवी ही इसका गवाह होगा ?
तीन दिसंबर 25 के बाद ही कथा वाचक का वीडियो ,मौनी बाबा का वीडियो ,नाबालिग का वीडियो सोशल मीडिया पर तैरने लगा।जब मामला गंभीर दिखाई देने लगा , इसके बाद थक हारकर नाबालिग ने शुक्रवार को यानि 19दिसंबर 25को मां के साथ थाना आयी और थाने में आवेदन दिया , मां के आवेदन पर थानाध्यक्ष ने प्राथमिकी दर्ज की। जबकि नाबालिग या परिजन के आवेदन पर नियमानुसार तीन अगस्त को ही प्राथमिकी दर्ज हो जानी चाहिये जो नहीं हुई ,अगर आवेदन में कोई त्रुटि थी तो उसी दिन उस त्रुटि को सुधार कर थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर लेना चाहिये था जो नहीं हुई ,इससे बड़ी लापरवाही थानाध्यक्ष की और क्या हो सकती हें।
इधर रविवार को कई वरीय पुलिस पदाधिकारी दिन में ही घटनास्थल का दौरा कर इस घटना से संबंधित जानकारी ली हें। एसडीपीओ सदर राजीव कुमार ने इसकी पुष्टि की हें।
सबको पता हें कि दरभंगा के एसएसपी ईमानदार हें और दिन रात हद से ज्यादा मेहनत करते हें ताकि पुलिसिया व्यवस्था चाक चौबंद रहें लेकिन ऐसे थानेदारों के द्वारा की जा रही घोर लापरवाही के कारण पुलिसिया व्यवस्था पर सवाल खड़े हो जाते हें,कि ऐसे थानाध्यक्षों को क्या फिर से प्रशिक्षण में भेजना आवश्यक हें ?इस पूरे मामले में अगर जांच होती हें तो सारा सबूत थाने के सीसीटीवी और प्राथमिकी के पन्ने में ही हें।