दरभंगा में कड़ाके की ठंड के बीच बढ़ी चोरी की वारदातें, पुलिस की ‘खामोश गश्ती’ पर उठते सवाल

दस्तक7मिडिया,बिरौल, दरभंगा।

जिले में पारा गिरते ही अपराधी सक्रिय हो गए हैं। हाल के दिनों में दरभंगा के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चोरी की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है। एक तरफ जहां लोग कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण गहरी नींद में सो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चोर इस ‘सुरक्षित समय’ का पूरा फायदा उठा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन चोरियों के पीछे सिर्फ गृह स्वामियों की लापरवाही है, या पुलिस की गश्ती व्यवस्था में आई सुस्ती?

‘जागते रहो’ की वह पुरानी पुकार अब मौन क्यों?

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले रात्रि गश्ती के दौरान ग्रामीण पुलिस (चौकीदार) लाठी पटकते हुए और ‘जागते रहो’ की आवाज लगाकर मोहल्ले के लोगों को सतर्क रखते थे। इस शोर मात्र से अपराधियों में भय रहता था और गृह स्वामी भी अपनी नींद के बीच एक बार चौकन्ने हो जाते थे।
परंतु, अब व्यवस्था बदल गई है। रात्रि गश्ती की गाड़ियां सायरन बजाए बिना या बिना किसी शोर के निकल जाती हैं, जिससे आम जनता को पुलिस की मौजूदगी का अहसास तक नहीं होता। लोगों का सवाल है— क्या पुलिस प्रशासन ने गश्ती के इस पारंपरिक और प्रभावी तरीके को बंद कर दिया है?
पुलिस का दायित्व बनाम नागरिकों की जिम्मेदारी
यह सच है कि पुलिस आपके घर के बाहरी हिस्से की सुरक्षा कर सकती है, लेकिन घर के भीतर के ताले और कीमती सामान की सुरक्षा स्वयं की जिम्मेदारी होती है। बावजूद इसके, पुलिस के पास चोरी रोकने का सबसे बड़ा हथियार ‘प्रभावी गश्ती’ और ‘अपराधियों में खौफ’ पैदा करना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को केवल सड़क पर गाड़ी घुमाने और वारंटियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मोहल्लों के अंदरूनी हिस्सों में पैदल गश्ती और सतर्कता संवाद को फिर से जीवित करना होगा।

परंपरागत गश्ती की वापसी हो –
ग्रामीण और शहरी इलाकों में पुलिस की उपस्थिति का अहसास कराने के लिए ‘विशिलिंग’ (सीटी बजाना) और ‘सतर्कता उद्घोष’ को पुनः अनिवार्य किया जाए।

पुलिस प्रशासन को व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों में भी ‘ऑपरेशन तीसरी आंख’ के तहत सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
हर वार्ड और गांव के स्तर पर चौकीदारों की ड्यूटी सुनिश्चित हो और उनकी मॉनिटरिंग थाना स्तर से की जाए।
मोहल्ला स्तर पर पुलिस की जन संवाद बैठकें कर लोगों को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए कि सोते समय गेट और खिड़कियों को कैसे सुरक्षित रखें।
दरभंगा पुलिस को अपनी कार्यशैली में तत्काल बदलाव लाने की आवश्यकता है। ठंड के इस मौसम में जब कोहरा अपराधियों के लिए ढाल बनता है, तब पुलिस की सक्रियता ही आम जनमानस के बीच सुरक्षा का भाव पैदा कर सकती है।