धर्म की आड़ में दरिंदगी? दरभंगा के चर्चित कथावाचक पर नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर आरोप, FIR में देरी पर उठे सवाल ,शिष्य को बचाने के लिये सोशल मीडिया पर दिये प्रवचन और दे डाली नसीहत ?
धर्म की आड़ में दरिंदगी? दरभंगा के चर्चित कथावाचक पर नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर आरोप, FIR में देरी पर उठे सवाल ,शिष्य को बचाने के लिये सोशल मीडिया पर दिये प्रवचन और दे डाली नसीहत ?
धर्म की आड़ में दरिंदगी? दरभंगा के चर्चित कथावाचक पर नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर आरोप, FIR में देरी पर उठे सवाल ,शिष्य को बचाने के लिये सोशल मीडिया पर दिये प्रवचन और दे डाली नसीहत ?
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा
दरभंगा जिले में एक चर्चित कथावाचक पर नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का आरोप सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है। यह आरोप कितना सही है और कितना गलत ,इसका अंतिम निर्णय तो प्राथमिकी दर्ज होने और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि धर्म और आस्था की आड़ में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाए जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।
देश के इतिहास में ऐसे कई तथाकथित संत–महात्मा हुए हैं, जिनके चरणों में कभी नेता, मंत्री और बड़े अधिकारी भी माथा टेकते थे। लेकिन जब उनके काले कारनामे उजागर हुए, तो वही लोग जेल की सलाखों के पीछे पहुँचे। गुरमीत राम रहीम, आसाराम बापू, स्वामी नित्यानंद, स्वामी सदाचारी जैसे और नाम आज भी समाज के लिए चेतावनी हैं।जिन पर बलात्कार, यौन शोषण और सेक्स रैकेट जैसे संगीन आरोप सिद्ध हुए।
ऐसे में किसी कथावाचक पर इस तरह का आरोप लगना कोई असंभव बात नहीं कही जा सकती। अगर आपने गड्ढा खोदा है, तो उसमें गिरना तय है ?बुरे कर्म का परिणाम भी बुरा ही होता है।
नाबालिग ने आरोप लगाया, सवाल यह नहीं कि क्यों ??सवाल यह है कि कैसे?
यह सवाल भी स्वाभाविक है कि किसी नाबालिग लड़की की आखिर कथावाचक से क्या दुश्मनी हो सकती है कि वह इतना गंभीर आरोप लगाए? यदि आरोप झूठा होता तो किसी और पर क्यों नहीं लगाया गया? आरोपों की गंभीरता इस बात की ओर इशारा करती है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच बेहद जरूरी है।
पीड़िता की मां द्वारा महिला थाना में दिए गए आवेदन में आरोप है कि कथावाचक ने नाबालिग को धार्मिक उपदेशों और विवाह का पाठ पढ़ाकर एक साल से अधिक समय तक बहलाया-फुसलाया। यह भी आरोप लगाया गया है कि लड़की को चुप रखने के लिए उसकी शादी करवा दी गई। इतना ही नहीं, कथावाचक पर नाबालिग को दवा (गोली) खिलाकर गर्भपात कराने का भी गंभीर आरोप है।और जब यह आरोप लगने लगे तो शिष्य को बचाने के लिये सोशल मीडिया पर गुरु के प्रवचन शुरू हो गये ,शिष्य ने तो नाबालिग पर 25लाख रुपये मांगने का आरोप लगा दिया।अगर 25लाख रुपये नाबालिग को लेना ही रहता तो महिला थाना तक परिजनों का आवेदन ही नहीं पहुंचता ?
गुरु-शिष्य गठजोड़ पर भी उठे सवाल
आरोप यह भी है कि कथावाचक को बचाने के लिए उसके गुरु ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सोशल मीडिया पर कथावाचक और उसके गुरु द्वारा सफाई दी जा रही है, शिष्य के चरित्र को “दूध से धुला” बताया जा रहा है। सवाल यह है कि यदि चरित्र सचमुच निष्कलंक होता, तो इस तरह की सफाई और बचाव की नौबत ही क्यों आती?
FIR में देरी: पुलिस की भूमिका भी कटघरे में
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि नाबालिग की मां द्वारा महिला थाना में शुक्रवार को ही आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। यह सीधे तौर पर पुलिस की लापरवाही की ओर इशारा करता है। जबकि कानून स्पष्ट है कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में तत्काल FIR दर्ज करना अनिवार्य है। FIR के बाद पीड़िता का धारा 164 के तहत न्यायालय में बयान भी दर्ज कराया जा सकता है, फिर प्राथमिकी दर्ज करने में देरी क्यों?कहीं लक्ष्मी का आगमन थाना तक तो नहीं पहुंचा ??
न्याय की कसौटी पर व्यवस्था
यह मामला सिर्फ एक कथावाचक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या धर्म के नाम पर प्रभावशाली लोग कानून से ऊपर हो गए हैं? अब देखना यह है कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ कब और कैसे कार्रवाई करता है।