बिरौल के लाल ने लहराया परचम, 21 साल की उम्र में अमर्त्य ने यूपीएससी, ईएसई परीक्षा के पहले ही प्रयास में पाई सफलता

दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, इसे सच कर दिखाया है दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र के सुपौल रामनगर निवासी अमर्त्य कुमार भारद्वाज ने। अमर्त्य ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित ईएसई परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में सफलता का परचम लहराकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
अमर्त्य ने यह उपलब्धि मात्र 21 वर्ष की अल्पायु में हासिल की है। उनके पिता अजय कुमार झा और माता अपर्णा कुमारी ने बताया कि अमर्त्य बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। उनकी इस सफलता से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर है। परिजनों के अनुसार, अमर्त्य ने अपनी इस सफलता से अपने पूर्वज प्रताप नारायण झा (उर्फ फूल बाबू) के सपनों को साकार कर उनका नाम गौरव से ऊंचा किया है।

प्रारंभिक शिक्षा से NIT तक का सफर–

अमर्त्य की शैक्षणिक यात्रा काफी प्रभावी रही है।
प्रारंभिक शिक्षा दरभंगा और पटना के सीबीएसई स्कूलों से हुई। उच्च शिक्षा उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए NIT पटना से शिक्षा प्राप्त की।सबसे खास बात यह रही कि अमर्त्य ने इस कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय ऑनलाइन संसाधनों और स्वाध्याय पर भरोसा किया।
प्रशासनिक सेवा अमर्त्य के परिवार के रगों में है। ग्रामीणों ने गर्व से बताया कि इसी परिवार के विश्वनाथ झा भी डिप्टी कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। अमर्त्य की सफलता ने इस विरासत को नई पीढ़ी में आगे बढ़ाया है। उनकी स्वर्गीय दादी आशा देवी और दादा जितेंद्र नाथ झा का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहा। परिजनों में विश्वनाथ झा, गणेश झा, प्रोफेसर विमल चन्द्र झा, गंगा नाथ झा,अभय झा,अमर झा,आलोक कुमार झा,विजय कुमार झा,गौतम झा के अलावा अजय बिरौलिया
सहित कई लोगों ने खुशी जताई। लोगों का कहना है कि अमर्त्य बचपन से ही होनहार थे और उनमें कुछ बड़ा करने का जज्बा दिखता था। उनकी सफलता पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लोगों का मानना है कि अमर्त्य की यह जीत उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में घर बैठे बड़ी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।