आय से अधिक संपत्ति मामले में बड़ा कदम: विशेष निगरानी इकाई करेगी सुप्रीम कोर्ट का रुख, एडीजी प्रशांत कुमार प्रकरण में SLP दायर करने का निर्णय

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई को और सशक्त बनाते हुए बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) स्तर के अधिकारी प्रशांत कुमार से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा प्राथमिकी रद्द किए जाने के आदेश के विरुद्ध माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का निर्णय लिया है।

विशेष निगरानी इकाई को विश्वसनीय सूत्रों से सूचना प्राप्त हुई थी कि वर्ष 1996 में बिहार निबंधन सेवा में योगदान देने के बाद से श्री प्रशांत कुमार, वर्तमान में सहायक महानिरीक्षक, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर, ने अपने सेवाकाल के दौरान भ्रष्ट एवं अवैध तरीकों से चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। प्राप्त शिकायत के आलोक में इकाई द्वारा प्रारंभिक जांच कराई गई, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि उन्होंने वर्ष 1996 से विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए लगभग 2,06,80,785 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

जांच के अनुसार, श्री प्रशांत कुमार की कुल आय (वेतन, बैंक ऋण एवं अन्य स्रोतों सहित) लगभग 2.95 करोड़ रुपये पाई गई, जबकि रसोई खर्च के अतिरिक्त अन्य मदों में करीब 2.57 करोड़ रुपये का व्यय किया गया। इस प्रकार आय-व्यय के विश्लेषण में भारी अप्रत्याशित असंतुलन सामने आया।

प्रारंभिक जांच के उपरांत पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने पर विशेष निगरानी इकाई थाना कांड संख्या-15/2022, दिनांक 09.11.2022, को धारा 120(B) भा.दं.वि. एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(b), 13(2) सह-पठित धारा 12 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद माननीय न्यायालय से तलाशी अधिपत्र प्राप्त कर विशेष निगरानी इकाई के वरीय अधिकारियों के नेतृत्व में पटना (बोरिंग कैनाल रोड), सिवान (न्यू बस्ती महादेवा) एवं मुजफ्फरपुर स्थित कार्यालयों व आवासीय परिसरों में व्यापक जांच एवं तलाशी अभियान चलाया गया।

तलाशी के दौरान 2,46,540 रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण (लगभग 54.5 लाख रुपये मूल्य), एसबीआई का एक बैंक लॉकर, जमीन में निवेश से जुड़े दस्तावेज, 11 बैंक खाते, एनएससी, एलआईसी एवं स्टार हेल्थ में निवेश संबंधी कागजात बरामद किए गए। इसके अतिरिक्त, अलख राज अपार्टमेंट, बोरिंग कैनाल रोड, पटना स्थित फ्लैट का मूल्य प्राथमिकी में शामिल नहीं था, इसके बावजूद जांच में लगभग 2,03,40,183 रुपये की आय से अधिक संपत्ति पाई गई, जो प्राथमिकी में दर्शाए गए आंकड़े के लगभग बराबर है। यह भी सामने आया कि Declaration of Assets and Liabilities नियमित रूप से भरा नहीं गया।

अनुसंधान के क्रम में अभियुक्त एवं उनकी पत्नी के नाम पटना में दुकानें, जी.वी. मॉल व बोरिंग रोड में व्यावसायिक संपत्तियां, कदमकुआं स्थित कार्यालय, गुरुग्राम (सेक्टर-56) में जमीन एवं मकान, पटना में फ्लैट तथा विभिन्न वित्तीय संस्थानों में निवेश की गहन जांच की जा रही है। साथ ही, उनके दोनों पुत्रों की उच्च शिक्षा पर लगभग एक करोड़ रुपये के संभावित खर्च का भी आकलन किया गया है।

इसी बीच, श्री प्रशांत कुमार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में प्राथमिकी रद्द करने हेतु याचिका दायर की गई, जिस पर दिनांक 21.11.2025 (निर्गत 08.12.2025) को न्यायादेश पारित करते हुए प्राथमिकी रद्द कर दी गई। यह एक माह के भीतर भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में प्राथमिकी रद्द होने का दूसरा मामला है।

उक्त आदेश पर अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार ने असंतोष व्यक्त करते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से माननीय उच्चतम न्यायालय में SLP दायर करने का निर्णय लिया है।