अफसरशाही के खिलाफ लोजपा (रा) का बिगुल, सरकार की साख बचाने के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान

दस्तक7मिडिया, गौड़ा बौराम, दरभंगा

गौड़ा बौराम अंचल में बेलगाम होती अफसरशाही और जनसमस्याओं के प्रति प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अब निर्णायक लड़ाई का मन बना लिया है। लोजपा (रा) के प्रखण्ड अध्यक्ष सह आर.टी.आई कार्यकर्ता राज कुमार झा ने अंचल पदाधिकारी की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि स्थानीय अधिकारी अपनी मनमानी से न केवल जनता को प्रताड़ित कर रहे हैं, बल्कि राज्य सरकार की छवि को भी धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास कर रहे हैं।


राज कुमार झा ने कहा कि अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार और लेट-लतीफी का अड्डा बन चुका है। उन्होंने कहा, “सरकार जनहित की योजनाएं बना रही है, लेकिन धरातल पर अधिकारी जनता को दौड़ाकर सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा कर रहे हैं। हम इसे मूकदर्शक बनकर नहीं देख सकते।” इसी क्रम में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए उन्होंने सूचना का अधिकार के तहत अंचल पदाधिकारी से तीखे सवाल पूछे हैं।
बताया जा रहा है कि
प्रशासनिक कार्यशैली की पोल खोलने के लिए राज कुमार झा ने चार महत्वपूर्ण बिंदुओं पर वर्ष-वार और आंकड़े-वार जानकारी मांगी है। जिसमें
वर्ष 2018 से अब तक बिहार सरकार की भूमि से अतिक्रमण हटाने के कितने मामले दर्ज हुए? कितनों का निष्पादन हुआ और कितने ठंडे बस्ते में पड़े हैं?
सरकारी जमीन पर पीढ़ियों से बसे कुल कितने परिवार हैं? इनमें से कितनों को अब तक जमाबंदी कायम की गई और कितनों को ‘बासगीत पर्चा’ देकर बसाया गया?
पिछले दो वर्षों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कितने आवेदन आए? कितने स्वीकृत हुए और कितने रिजेक्ट? साथ ही, आवेदनों को रद्द करने के पीछे की सरकारी नियमावली क्या है? वर्ष 2020 से अब तक जमीन के रिकॉर्ड में सुधार (परिमार्जन) के कितने आवेदन प्राप्त हुए? कितने मामलों का निपटारा हुआ और कितने आज भी लंबित हैं?
राज कुमार झा ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और कार्रवाई नहीं की गई, तो लोजपा (रामविलास) चुप नहीं बैठेगी।
> “हम जनता के अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। अगर अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और सुस्ती खत्म नहीं हुई, तो हम चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी अंचल प्रशासन की होगी।
बता दें कि यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सरकार बनाम अफसरशाही की लड़ाई का रूप लेता जा रहा है। अब देखना होगा कि अंचल प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है या फिर गौड़ा बौराम एक बड़े जन-आंदोलन का गवाह बनता है।