न्यायालय के आदेश पर मचा हड़कम्प : पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग खाली कराने पहुंचा प्रशासन ,खाली हाथ लौटी।

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद आखिर रविवार को उबाल पर आ गया, जब विश्वविद्यालय प्रशासन न्यायालय के निर्देश का पालन कराने के लिए भारी प्रशासनिक दलबल के साथ विभाग परिसर पहुंचा। जैसे ही अधिकारियों ने भवन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की, विभागाध्यक्ष व शिक्षकों ने इसका विरोध जताया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

 विभागाध्यक्ष ने कहा— ‘इस्तीफा दे दूंगी, पर भवन नहीं छोड़ूंगी’

सूत्रों के अनुसार, विभागाध्यक्ष ने प्रशासनिक टीम के सामने साफ कहा कि वह नौकरी छोड़ना मंजूर कर लेंगी, लेकिन वर्षों से उपयोग में आ रहे भवन को खाली नहीं करेंगी।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि मामला न्यायालय में स्पष्ट है और आदेश का पालन करना अनिवार्य है।

तनाव बढ़ते देख प्रशासन ने परीक्षा को प्रभावित न होने देने के लिए 26 दिसंबर तक का समय दिया। दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत चली और अंततः निर्णय लिया गया कि फिलहाल परीक्षा निर्धारित तिथियों पर होगी, ताकि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो।

भवन पर दो विभागों का दावा… और यहीं से शुरू हुआ विवाद

मूल विवाद यह है कि सूचना विज्ञान (IT) विभाग अपने लिए भवन की मांग कर रहा है, जबकि वर्तमान में पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग इसी भवन में संचालित हो रहा है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि भवन मूल रूप से आईटी विभाग को आवंटित है और न्यायालय ने भी इसी के अनुरूप आदेश दिया है।
लेकिन वर्षों से इसी जगह संचालित विभाग ने इसे न मानने की बात कही।

 प्रशासन ने दी अंतिम मोहलत : 26 दिसंबर तक सब स्पष्ट करें

प्रशासन ने साफ कहा कि परीक्षा खत्म होने तक स्थिति जस की तस रहेगी।
26 दिसंबर के बाद भवन आवंटन संबंधी अंतिम कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो कड़े कदम उठाए जाएंगे।

वर्ष 1987 से भवन पर है कब्जा : आशुतोष दत्ता

राजद नेता व शहर के सामाजिक कार्यकर्ता अशुतोष दत्ता ने बताया कि 1987 में संगीत विभाग को यह भवन अस्थायी रूप से दिया गया था।
लेकिन मामला कभी स्पष्ट नहीं हुआ और वर्षों से विभाग इसी में संचालित होता आ रहा है।
आईटी विभाग का दावा है कि यह भवन हमेशा से उनका था, परंतु लंबे समय तक उपयोग न होने से संगीत विभाग ने इसका उपयोग जारी रखा।
दत्ता ने मांग की कि विश्वविद्यालय को दोनों विभागों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालना चाहिए, ताकि छात्रों को परेशानी न हो।

 छात्रों की मांग – “हमारी पढ़ाई और परीक्षा प्रभावित न हो”

दोनों विभागों के छात्रों ने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी स्थिति में कक्षाएं और परीक्षाएं बाधित न हों।
कई छात्रों ने कहा कि वर्षों से चल रहे विवाद में सबसे ज्यादा नुकसान उनकी पढ़ाई का हो रहा है।

26 दिसंबर होगी निर्णायक तारीख

प्रशासन एक ओर न्यायालय के आदेश को लागू करना चाहता है, तो विभाग इसे अपनी अस्मिता का प्रश्न मान रहा है।
अब सबकी निगाहें 26 दिसंबर पर टिक गई हैं, जब विश्वविद्यालय भवन आवंटन पर अंतिम फैसला लेगा।