कटिहार के बलरामपुर प्रखंड स्थित धनहरा गांव के 45 वर्षीय प्रवासी मजदूर नजरुल आलम का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। नजरुल आलम की मौत मुंबई के उरण इलाके में एक 10 मंजिला इमारत पर काम करते समय पैर फिसलने से हुई थी। यह घटना 25 नवंबर को हुई थी।

परिजनों ने बताया कि नजरुल आलम रोज की तरह ऊंची इमारत पर काम कर रहे थे, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वे नीचे गिर गए। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतक अपने पीछे दो बेटे और दो बेटियां छोड़ गए हैं।

विधायक ने संवेदना की व्यक्त

मृतक के घर पहुंचे माले विधायक दल के नेता और पूर्व विधायक महबूब आलम ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार और सीमांचल क्षेत्र के लाखों मजदूर रोजगार की तलाश में पंजाब, हरियाणा, गुजरात, जयपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाते हैं।

आलम ने सरकार से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हादसों में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों को मिलने वाली 2 लाख रुपए की सहायता राशि अपर्याप्त है। इसे बढ़ाकर कम से कम 30 लाख रुपए किया जाना चाहिए।

महबूब आलम ने प्रवासी मजदूरों के लिए सेफ्टी ऑडिट और उनकी निगरानी को भी अनिवार्य करने की बात कही।

पार्थिव शरीर पहुंचने पर उमड़ी लोगों की भीड़।
स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की अपील

स्थानीय निवासी मो. आरिफ ने भी सरकार से स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार स्थानीय उद्योगों और रोजगार के अवसर प्रदान करे, तो मजदूरों को जोखिम भरे काम के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा।

नजरुल आलम की मौत के बाद उनके परिजन अब सरकार से उचित मुआवजा और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।