हमारा संविधान, हमारी पहचान।
जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में ‘संविधान दिवस’ पर अभूतपूर्व आयोजन

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल के राजनीति विज्ञान विभाग ने भारतीय संविधान दिवस को अत्यंत धूमधाम, गरिमा और पूर्ण संवैधानिक मर्यादा के साथ मनाया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य भारत के संविधान की सर्वोच्चता को पुनः प्रतिष्ठित करना और युवा पीढ़ी में संवैधानिक चेतना, कर्तव्य-बोध, और अटूट लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना था।कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सूर्य नारायण पाण्डेय ने किया, जिन्होंने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में संविधान की लचीली, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक संरचना की सराहना की। उन्होंने कहा कि “भारत का संविधान तानाशाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र का आधार है। राजसत्ता जनता से आती है, कानून का शासन सर्वोच्च है, और स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र की मजबूत रक्षक है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, और यह आवश्यक है कि हम अधिकार और कर्तव्य को एक-दूसरे का पूरक समझें।”


कार्यक्रम में मैथिली विभाग के डॉ. राज कुमार प्रसाद द्वारा लिखित कथा संग्रह (मैथिली) “FIR” का विशेष विमोचन हुआ। उन्होंने संविधान को ‘प्रकाश’ बताते हुए कहा कि संवैधानिक न्याय, स्वतंत्रता, अधिकार, और कर्तव्य के बीच का संतुलन ही राष्ट्र को मजबूती प्रदान करता है। डॉ. दिलीप कुमार ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए, संविधान के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संविधान पहले विधि-दिवस के रूप में मनाया जाता था। सामाजिक लोकतंत्र के पुरोधा डॉ. आंबेडकर ने समता और स्त्री-पुरुष समानता को संविधान का आधार बनाया। आजादी के संघर्ष के समन्वय से ही यह महान ग्रंथ लिखा गया।” उपस्थित श्री क्रांति कुमार,डॉ. भवेश कुमार ,डॉ. बिन्दुनाथ झा,डॉ. शिवकुमार,डॉ. आबिद करीम,डॉ. राम नरेश, सहित छात्र-छात्राओं ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए संवैधानिक चेतना के मनोवैज्ञानिक महत्व को स्पष्ट किया।कार्यक्रम का समापन डॉ. शारदा कुमारी (राजनीति-विभाग) के हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। मौके पर नीशू, विनीत, तस्लीम, निगार, कन्हैया, सुभाष, आदि मौजूद थे।