बिना सत्यापन थानों की गाड़ियाँ चला रहे प्राइवेट ड्राइवर,गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा, ड्राइवरों की कमी या लापरवाही? थानों में प्राइवेट ड्राइवरों की तैनाती से बढ़ी चिंता
बिना सत्यापन थानों की गाड़ियाँ चला रहे प्राइवेट ड्राइवर,गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा, ड्राइवरों की कमी या लापरवाही? थानों में प्राइवेट ड्राइवरों की तैनाती से बढ़ी चिंता
बिना सत्यापन थानों की गाड़ियाँ चला रहे प्राइवेट ड्राइवर,गोपनीय जानकारी लीक होने का खतरा,
ड्राइवरों की कमी या लापरवाही? थानों में प्राइवेट ड्राइवरों की तैनाती से बढ़ी चिंता
दस्तक 7मीडिया /गुड्डू राज
दरभंगा जिले के कई थाना क्षेत्रों में इन दिनों एक गंभीर मामला चर्चा में है। बताया जा रहा है कि कई थानों की सरकारी गाड़ियाँ प्राइवेट ड्राइवरों से चलवाई जा रही हैं, जबकि पुलिस विभाग के नियमों के अनुसार ऐसा करना पूरी तरह गलत है। इन निजी ड्राइवरों का न तो कोई चरित्र सत्यापन (वेरिफिकेशन) हुआ है और न ही ये पुलिस विभाग के अधीन आते हैं। पहले थानों में गाड़ी चलाने का काम या तो विभाग के स्थायी और प्रशिक्षित ड्राइवर करते थे, या फिर वे पुलिसकर्मी जिन्हें इसके लिए खास प्रशिक्षण दिया गया था। इस व्यवस्था में हर ड्राइवर का रिकॉर्ड साफ होता था और संवेदनशील जानकारी भी केवल जिम्मेदार लोगों तक सीमित रहती थी। लेकिन अब ड्राइवरों की कमी का हवाला देकर कई थानों में निजी ड्राइवरों को गाड़ी चलाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जिन लोगों की जांच नहीं हुई है और जिनके पास गोपनीय जानकारी संभालने का अधिकार नहीं है, उन्हें सरकारी वाहन चलाने देना सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी चूक है। थाने की गाड़ी सिर्फ सफर का साधन नहीं होती; वह कई बार छापेमारी, गिरफ्तारी, निगरानी और विशेष अभियान का हिस्सा होती है। ऐसे में जब गाड़ी प्राइवेट ड्राइवर चलाता है, तो उसे पुलिस टीम की गतिविधियों, गंतव्य और कार्रवाई से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिल जाती हैं। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि कुछ मामलों में ये जानकारी बाहर तक भी चली जाती है, जिससे अपराधियों को पहले ही खबर हो सकती है। यह पुलिस कार्रवाई को कमजोर कर देता है। कुछ शिकायतों में यह भी सामने आया है कि कुछ प्राइवेट ड्राइवर स्थानीय स्तर पर किसी को फँसाने,किसी को बचाने,या पुलिस की गलत जानकारी फैलाने जैसे कामों में शामिल पाए गए हैं। स्थानीय राजनीति और व्यक्तिगत प्रभाव का भी इन ड्राइवरों के जरिए गलत इस्तेमाल होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस विभाग के नियम साफ कहते हैं कि थाना की गाड़ी वही व्यक्ति चलाएगा जो विभाग द्वारा नियुक्त और अधिकृत हो। किसी भी निजी व्यक्ति को सरकारी वाहन चलाने देना नियम का उल्लंघन है और इसके लिए संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
दरभंगा में बढ़ते अपराध और संवेदनशील इलाकों में बढ़ी पुलिस गतिविधि के बीच, प्राइवेट ड्राइवरों का प्रयोग सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। इसका असर जांच,गिरफ्तारी और पुलिस की छवि तीनों पर पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह मामला अब वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में है। संभव है कि थानों से रिपोर्ट मांगी जाए, निजी ड्राइवरों पर रोक लगे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू हो। फिलहाल यह मामला जिले में जवाबदेही और सुधार की दिशा में बढ़ रहा है।