जन्मजात ‘विकलांगता’ को दी मात, एक पैर वाले राम शर्मा ने 30 फीट गहरे तालाब से बचाई 60 वर्षीय महिला की जान

दस्तक7मिडिया, अमीत झा, गौड़ा बौराम।

गौराबौराम प्रखंड अंतर्गत परबत्ता गांव में मानवता और अदम्य साहस का एक ऐसा उदाहरण सामने आया, जिसने साबित कर दिया कि असली नायकों को शारीरिक सीमाओं से नहीं बांधा जा सकता।
यहां के राम शर्मा ने, जो जन्म से ही एक पैर न होने के कारण विकलांग हैं, अपनी जान की परवाह किए बिना 30 फीट गहरे और कड़ाके के ठंडे तालाब में कूदकर एक डूबती हुई वृद्ध महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से कहा, “राम शर्मा सिर्फ नाम के राम नहीं, वह सचमुच कर्म के भी राम हैं।”घटना सुबह करीब 5 बजे की है। परबत्ता की एक 60 वर्षीय महिला शौच के लिए गई थीं, तभी अचानक उनका पैर फिसला और वह पास के गहरे तालाब में जा गिरीं। देखते ही देखते वह महिला गहराई में जाने लगीं। बचाओ! बचाओ!’ की चीख-पुकार सुनकर दर्जनों लोग तालाब के चारों तरफ जमा हो गए, लेकिन उस समय के दृश्य ने सभी को हिला दिया। तालाब की अथाह 30 फीट गहराई और सुबह के ठंडे पानी का खौफ इतना ज्यादा था कि कोई भी उस महिला को बचाने के लिए आगे आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। हर कोई असहाय खड़ा मौत को करीब आते देख रहा था। तभी भीड़ के बीच से एक परिचित आवाज उभरी। वह थे गांव के राम शर्मा। बचपन से ही एक पैर की कमी के बावजूद, राम शर्मा ने पल भर भी संकोच नहीं किया। उन्होंने मानव जीवन की कीमत को अपनी शारीरिक बाधा और जान के जोखिम से कहीं ऊपर रखा। जैसे ही उन्होंने ठंडे पानी में छलांग लगाई, वहां मौजूद सभी लोग हतप्रभ रह गए। लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत और संघर्ष के बाद, राम शर्मा ने उस वृद्ध महिला को सफलतापूर्वक पकड़ लिया और किनारे तक सुरक्षित खींच लाए। वृद्ध महिला को सुरक्षित पाकर वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। यह मंजर देखने वाले हर ग्रामीण की आंखें राम शर्मा के प्रति सम्मान से भर गईं। राम शर्मा ने अपनी विकलांगता को अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया, बल्कि उसे अपने असाधारण साहस और निस्वार्थ सेवा से ढक दिया। ग्रामीण राम शर्मा की हिम्मत की प्रशंसा करते नहीं थक रहे हैं। ग्रामीण संजय झा ने राम शर्मा को सम्मानित करने का निर्णय लिया।